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डीजल के दाम बढ़ने से अन्नदाता परेशान

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जालौन/सरावन/माधौगढ़। कभी सूखा तो कभी बाढ़ की विभीषिका से जूझते बुंदेलखंड के किसानों के लिए डीजल के दामों में बढ़ोतरी किसी परेशानी से कम नहीं है। बैंक और साहूकारों के कर्ज के बोझ तले दबे यहां के किसानों के लिए महंगे डीजल के साथ खेतों की जुताई और सिंचाई करना आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर खेती बाड़ी भी अब किसानों के लिए महंगा सौदा बन जाएगी।
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इस बात को जनपद के किसान भी बखूबी जानते हैं, यही कारण है कि उनके माथे पर चिंता की लकीरें अभी से नजर आने लगीं हैं। उनका कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने से समस्या और बढ़ेगी। पत्नी के गिरवी जेवर छुड़ाने, बेटी की शादी की चिंता के साथ-साथ मंहगे डीजल का इंतजाम करने बारे में भी सोचना पड़ेगा। खेती के सापेक्ष उपज का उचित मूल्य वैसे भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में डीजल के बढ़ते दाम वाकई किसी नई मुसीबत से कम नहीं है। प्रस्तुत है, किसानों से बातचीत पर आधारित क्षेत्रीय संवाददाताओं की रिपोर्ट-

खाद, बीज के बाद अब डीजल की मार
जालौन के किसान राजीव माहेश्वरी के मुताबिक एक तो खाद व बीज की महंगाई के अलावा बिजली की समस्या के चलते किसान वैसे भी परेशान हैं। ऐसे में डीजल के दाम बढ़ाकर सरकार ने किसानों पर और बोझ डालने का कार्य किया है। डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर अब आटा, दाल व चावल पर भी पड़ेगा। इससे आम आदमी की भी जेब ढीली होगी।
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महंगी होगी जुताई, छोटे किसानों की समस्या बढ़ेगी
जालौन के ही किसान सलिल शुक्ला का कहना है कि डीजल की कीमत में बढ़ोतरी से जुताई भी महंगी हो जाएगी। डीजल के बढ़े दाम किसानों को कर्जदार भी बना सकते हैं। बड़े किसान तो फिर भी काम चला लेंगे, लेकिन जुताई के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल छोटे किसानों के सामने आने वाली है। लिहाजा दामों में बढ़ोतरी नहीं की जानी चाहिए।

बढ़ेगी लागत, घटेगा किसानों का मुनाफा
सरावन के किसान कमलापत कुशवाह कहते हैं कि डीजल के दाम बढ़ने से खेती की लागत काफी बढ़ जाएगी। इसमें ट्रैक्टर की जुताई से लेकर ट्यूबवेल से सिंचाई तक के खर्च में इजाफा होना तय है। उसके विपरीत मुनाफे में भी कमी आएगी, क्योंकि उर्वरक, कीटनाशक, खाद आदि के दाम भी तो पहले से ही बढ़े हुए हैं। कुल मिलाकर किसानों के हिस्से में सिर्फ दिक्कतें ही आने वाली हैं।

पहले पानी, अब डीजल बना मुसीबत
माधौगढ़ के किसान जगपाल प्रजापति बोले कि लगातार पांच सालों से किसान दैवी आपदा से जूझ रहा है। ऐसे में डीजल के दामों ने तो मानो किसान की कमर ही तोड़ दी है। हाल ही खरीफ की फसल पानी से बर्बाद हो गई, अब आगे की फसल की सिंचाई के लिए डीजल के बढ़े दाम भी बर्बादी का कारण बन सकते हैं। किसानों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
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सूखे, बाढ़ से जूझते बुंदेलखंड के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
अमर उजाला ब्यूरो
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