अब की सावन में जमकर बरसे बदरा
330 एमएम बारिश ने तोड़ा 10 सालों का रिकार्ड
किसानों को नहीं रही सिंचाई के लिए पानी की चिंता
गहराई वाले खेतों में जलभराव ने माथे पर डाले बल
अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। इस बार सावन के महीने में हुई बारिश ने पिछले 10 सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने शुरूआत में कम बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन बादलों ने उनकी गणित को गलत साबित कर दिया। झमाझम बारिश से किसानों को राहत मिली। उन्हें खेतों में फसल के लिए सिंचाई की चिंता नहीं रही। हालांकि गहराई वाले खेतों में जलभराव होने से अच्छी पैदावार की उम्मीदें पूरी होती नहीं दिख रही हैं।
मौसम विभाग ने पिछले सालों की तरह इस बार भी कम बारिश की संभावना जताई थी। किसानों से कम पानी वाली फसलों को अधिक क्षेत्र में बोने की अपील सावन माह के शुरूआत में की गई थी। मौसम विभाग का अनुमान था कि कम बारिश होगी। ऐसे में जिला सूखा घोषित हो सकता है। सावन की शुरुआत जरूर कम बारिश से हुई लेकिन आधे माह के बाद बादल जमकर बरसे। स्थिति यह है कि इस साल बारिश के महीने में अब तक 330.5 एमएम बरसात रिकार्ड की गई। मौसम विशेषज्ञों ने अभी 20-30 एमएम बारिश और होने की संभावना व्यक्त की है। मौसम विशेषज्ञ की मानें तो बारिश ने 10 सालों का रिकार्ड तोड़ा है। इससे पहले 2010 में 271 एमएम बारिश रिकार्ड की गई थी। जबकि 2014 में सावन के महीने में मात्र 52.9 एमएम बारिश रिकार्ड की गई थी। मौसम विशेषज्ञ संदीप सिंह की मानें तो खेतों को पर्याप्त पानी मिल गया है, जो फसलों की पैदावार बढ़ाने में लाभदायक होगा।
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2008 से लेकर 2018 तक बारिश की स्थिति
वर्ष सावन में हुई बारिश
2008 221 एमएम
2009 258 एमएम
2010 271 एमएम
2011 259.8 एमएम
2012 125.7 एमएम
2013 79.3 एमएम
2014 52.9 एमएम
2015 123.8 एमएम
2016 137.1 एमएम
2017 210.9 एमएम
2018 330.5 एमएम
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इस बार बारिश से खेतों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल चुका है। खेतों की पर्याप्त नमी फसलों की अच्छी पैदावार के लिए सहायक होगी।
- विजय कुमार, डीडी कृषि
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फोटो 26एयूआरपी15- फूल सिंह
इस बार बारिश खूब हुई है। धान की फसल बोने वाले किसानों के सामने पानी का संकट था, जो अब नहीं हैं। बारिश ने धान की फसल बोने वाले किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी है।
-फूल सिंह, धीरजपुर
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फोटो 26एयूआरपी16- सूबेदार
इस बार बारिश ने लगभग सभी फसलों को बोने वाले किसानों को राहत दी। एक माह पहले बाजरा की फसल बोने वालों के लिए दिक्कतें पैदा हुई हैं। बाजरा दोबारा बोना पड़ेगा।
सूबेदार, औरैया