अमर उजाला ब्यूरो
माधौगढ़ (जालौन)। घर आई बारात लौटाकर एक बेटी ने साबित कर दिया कि अब शादी जैसे मामलों में गांव की लड़कियों पर भी परिवार के लोगों की मनमानी नहीं चल सकती। मामला हरौली गांव का है जहां नाटा दूल्हा देखकर दुल्हन से शादी से इंकार कर दिया। वर-वधू पक्ष के लोग दुल्हन को काफी देर तक समझाते रहे लेकिन वह शादी के लिए राजी नहीं हुई। बाद में पुलिस व ग्राम प्रधान ने समझौता कराया और बारात को बैरंग वापस लौटना पड़ा।
माधौगढ़ कोतवाली क्षेत्र के ग्राम हरौली निवासी रामलखन सिंह ने नातिन रूबी सिंह तोमर की शादी इटावा जिले के थाना इकदिल क्षेत्र के ग्राम सिकवा निवासी कप्तान सिंह के बेटे पुष्पेंद्र से तय की थी। मंगलवार को दोनों की शादी थी। शाम को बारात रामलखन के दरवाजे पहुंची। द्वारचार की रस्म के बाद जब पुष्पेंद्र स्टेज पर पहुंचा तो वहां सहेलियों के साथ जयमाल डालने आई दुल्हन रूबी ने पुष्पेंद्र का कद अपने से छोटा देखकर शादी से इंकार कर दिया। शादी के लिए न सुनकर वहां सन्नाटा पसर गया।
वर व वधू पक्ष के लोग सकते में आ गए। उन्होंने रूबी से शादी न करने की वजह पूछी तो उसने कहा कि दूल्हे की लंबाई उससे भी कम है, जिससे वह उससे शादी नहीं कर सकती। यह कहकर रूबी अपने कमरे में चली गई। उधर अफरातफरी का माहौल हो गया। वर व वधू पक्ष के लोग आमने सामने आ गए। मामला बिगड़ता देखकर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस भी वहां पहुंच गई। दोनों पक्षों के लोगों ने रूबी को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह तैयार नहीं हुई। इसके बाद पुलिस अफसरों व ग्राम प्रधान अनुराग प्रताप सिंह ने दोनों पक्षों को आमने सामने बैठाकर लेनदेन का समझौता कराया और बारात बैरंग वापस लौट गई।
जब रूबी ने शादी से इंकार किया तो उसे नाना नानी व रिश्तेदारी सकते में आ गए। फिर बाद में शादी न करने की वजह जानकर उन्हेंने उसके फैसले पर संतुष्टि जाहिर की। रिश्तेदारों ने कुछ दबाव भी बनाया, लेकिन नाना नानी ने कहा कि उसका निर्णय ही उनका निर्णय है। जीवनयापन उसे ही करना है। इसलिए उसे अपना अच्छा बुरे का फैसला लेने का पूरा अधिकार है।
रूबी बचपन से ही अपने नाना रामलखन सिंह के यहा हरौली गांव में ही रहती है। दरअसल रामलखन ने अपनी बेटी किरन की शादी 22 वर्ष पहले मध्यप्रदेश के भिंड जिले के गांव वरौना में मथुरा सिंह तोमर के साथ की थी। रामलखन उसे तीन वर्ष की आयु में ही अपने साथ ले आए थे। एक वर्ष पूर्व ही छत से गिरकर रूबी की मां किरन की मौत हो गई थी। उसका एक छोटा भाई संजय भी है।
रूबी से जब उसके लिए फैसले के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि वह कोई गलती नहीं कर रही है। पढ़ने लिखने का मतलब सिर्फ अच्छी नौकरी पाना नहीं होता है बल्कि अपने हक की लड़ाई लड़ना भी होता है। वह ऐसी कोई गलती नहीं करना चाहती, जिससे आगे चलकर कोई उसका व उसके जीवनसाथी का मजाक उड़ाए। इसलिए उसने दोनों की भलाई के लिए इस शादी से इंकार किया है।
-माधौगढ़ क्षेत्र के हरौली गांव का मामला, इटावा से आई थी बारात
-लेनदेन के समझौते के बाद खाली हाथ लौटी बारात