औरैया। आजादी के अमृत महोत्सव में क्रांतिकारियों की यादें एक बार फिर से ताजा हो गई हैं। अंग्रेजों से जंग लड़ते हुए देवकली के पास 17 स्वतंत्रता सेनानी शहीद हुए थे।
देवकली मंदिर समीप शहीदों की याद में स्मारक भी बनाया गया है। जो आज भी आजादी की जंग की गाथा को संजोए है। भारत प्रेरणा मंच के जिला महासचिव अविनाश अग्निहोत्री ने बताया कि गांव खानपुर निवासी रामप्रसाद पाठक व उनके 16 साथियों ने तत्कालीन कलेक्टर एओ ह्यूम से गुरिल्ला युद्ध लड़ा था। 29 जनवरी 1857 को अंग्रेजी सेना ने स्वतंत्रता सेनानियों को देवकली मंदिर के पास घेर लिया था।
औरैया के क्रांतिवीर और भरेह के कुंवर रूप सिंह, चकरनगर के राजा निरंजन सिंह व खानपुर के राम प्रसाद पाठक की सम्मिलित क्रांतिकारी सेना बनी थी। इस सेना ने ग्वालियर से अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करके आई बटालियन के साथ मिलकर 25 जून 1857 को औरैया व बेला तहसील पर हमला कर तहसीलदार बेला की हत्या कर दी थी। बाद में बेला और औरैया तहसीलों को ब्रिटिश हुकूमत से मुक्त कराया था।
28 नवंबर 1857 को इटावा कलेक्टर एओ ह्यूम ने औरैया क्षेत्र पर दोबारा कंपनी का शासन स्थापित करने के लिए दिलीप नगर के राव जसवंत सिंह, लखना के तहसीलदार ईश्वर सिंह व औरैया के तहसीलदार रामबक्श वैश्य के साथ ब्रिटिश सेना भेजी।
इस दौरान देवकली मंदिर में शरण लिए क्रांतिकारियों पर हमला किया था। तब देवकली मंदिर क्षेत्र में कुंवर रूप सिंह, रामप्रसाद पाठक, राजा निरंजन सिंह, लालपुरी गोस्वामी व प्रीतम सिंह आदि रणबांकुरों ने ब्रिटिश सेना से मुकाबला कर उन्हें पीछे खदेड़ दिया था।
उन्होंने बताया कि 29 नवंबर को कलेक्टर एओ ह्यूम ने ब्रिटिश सेना की सहायता के लिए अतिरिक्त सैन्य बल भेजा था। इस दौरान ब्रिटिश सेना से मुकाबला कर खानपुर के राम प्रसाद पाठक अपने 16 साथियों के साथ इस युद्ध में शहीद हो गए थे।
हालांकि इस युद्ध में कई अंग्रेज सैनिक भी मारे गए थे। इस शहादत की सूचना अंग्रेज शासकों ने अपने अधिकारियों को पत्र द्वारा दी थी। इस पत्र में रामप्रसाद पाठक को रियल लीडर ऑफ द फील्ड कहकर संबोधित किया गया था।