अजीतमल (औरैया)। कपट रहित नि:स्वार्थ भाव से प्रभु की शरण में पहुंचने वालों को प्रभु अपना बना लेते हैं। हर वक्त उसकी मदद करते हैं। भगवान कहते हैं कि मेरे ऊपर अपना भार छोड़कर के तो देख। अंतिम दिन की कथा के बाद हवन-पूजन के साथ श्रीमद्भागवत कथा का समापन किया गया।
अजीतमल के मोहल्ला आजादनगर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में वृृंदावन मथुरा के आचार्य पंडित अनुरूद्ध महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने श्रोताओं को श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का सार बताते हुए कहा कि रावण से तिरस्कृत होकर जब विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचा तो प्रभु राम ने विभीषण को अपना भक्त तो बना ही लिया साथ ही लंका का राज्य भी तिलक कर दे दिया। इसलिए प्रभु को शरणागतवत्सल भगवान भी कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि यदि आज समाज के लोग नि:स्वार्थ भाव से प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने आचरण में उतार कर उनके बताए मार्गों पर चलना शुरू कर दें तो रामराज बनाने की कोशिश नहीं करना पड़ेगी बल्कि रामराज स्वत: ही स्थापित हो जाएगा। उन्होंने अंतिम दिन की कथा में सुदामा चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जो भी भगवान को नि:स्वार्थ भाव से भक्ति करता है, भगवान उसकी सदैव मदद करते हैं। अंतिम दिन की कथा के बाद हवन पूजन का भी कार्यक्रम किया गया। इसमें आयोजकों द्वारा हवन में आहुतियां दी गईं। इस अवसर पर परीक्षित संजय अग्रवाल, चंद्रकुमार अग्रवाल एवं अखिलेश अग्रवाल के अलावा व्यवस्थापक नवीन गुप्ता, कुक्कू, मंगल रोहित, रविकांत, बंटू व राजू आदि लोग मौजूद रहे।
-हवन पूजन के बाद श्रीमद्भागवत कथा का समापन
अमर उजाला ब्यूरो