औरैया। रोजगार सेवकों की हालत दयनीय हो चुकी है। उन्हें लगभग 10 माह का मानदेय नहीं मिला है। ऐसे में वह बेरोजगारों की तरह रहने को मजबूर हैं। इनका कहना है कि अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन ही मिला है। मानदेय न मिला तो उनका होली का रंग फीका रह सकता है।
रोजगार सेवक को हर माह छह हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। मनरेगा में काम की डिमांड, उसे आवंटित करने, उसका मास्टर प्लान तैयार कराने से लेकर भुगतान कराने तक की जिम्मेदारी रोजगार सेवक की होती है। यही नहीं, इनसे चुनाव संबंधी कामों में भी सहयोग लिया जाता है। ऐसे में रोजगार सेवक रोजगार में तो हैं लेकिन उन्हें पिछले छह से 10 माह का मानदेय लंबित पड़ा है। मानदेय न मिलने से कई रोजगार सेवकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है तो कई रोजगार सेवक लेकर काम चला रहे हैं। महीनों से मानदेय न मिलने पर रोजगार सेवकों की हालत बेरोजगारों जैसी हो चुकी है।
रोजगार सेवक सुधीर कुमार ने बताया कि पिछले तीन साल से उन्हें मानदेय काफी जद्दोजहद करने के बाद मिल रहा है। बताया कि पिछले छह महीन से मानदेय न मिलने से आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
रोजगार सेवक दिलीप कुमार ने बताया कि छह माह से मानदेय न मिलने से कार्यालय आने व ग्राम पंचायतों में पहुंचने के लिए सहयोगियों से रुपये उधार लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। अधिकारियों को जानकारी दी गई है। लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
रोजगार सेवक राहुल अवस्थी ने बताया कि कई रोजगार सेवक ऐसे हैं जिन्हें आठ से 12 महीनों का मानदेय नहीं मिला है। कुछ दिनों बाद होली का त्योहार आने वाला है। शीघ्र ही मानदेय न मिला तो रोजगार सेवकों की होली का रंग फीका रह सकता है।
रोजगार सेवक धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि कहने को तो वह रोजगार सेवक हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को रोजगार दिलाने का काम करते हैं, लेकिन हकीकत में उनकी हालत बेरोजगारों से भी खराब हो चुकी है। हर माह यदि समय से मानदेय मिले तो काफी राहत मिले।
सीडीओ श्रीकृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। किसी कार्यदिवस में वह इस मामले को गंभीरता से दिखवाएंगे। अगर ऐसा है तो रोजगारसेवकों को मानदेय दिलाया जाएगा।
-हर माह दिया जा रहा आश्वासन पर नहीं मिल रहा मानदेय
-होली के त्योहार को लेकर चिंतित हैं रोजगार सेवक
अमर उजाला ब्यूरो