औरैया। दिबियापुर कस्बे से सटी सेहुद ग्राम पंचायत में कंप्रेसर बंबे के पास 30 करोड़ कीमत की 11.69 एकड़ जमीन हथियाने के मामले में जहां अप्रैल माह में मुकदमा दर्ज किया गया है।
वहीं शुक्रवार को सदर तहसील प्रशासन ने इस जमीन को ऊसर नाम से दर्ज कराया। इस जमीन को आरोपियों ने अपने नाम चढ़वा लिया था। सालों से इस जमीन पर फसलें उगाई जा रही थीं। सूत्रों की माने तो दो-तीन दिन के अंदर तहसील प्रशासन इस जमीन को ग्राम सभा के सुपुर्द कर देगा।
कंप्रेसर बंबे के पास पॉलिटेक्निक रोड के समीप सालों पहले पशु बाजार लगता था। ऊसर की इस जमीन पर सालों पहले लोगों की निगाहें इस कदर टिकीं कि फर्जी प्रविष्टि के सहारे चकबंदी प्रकि्रया के दौरान कुछ लोग इस पर काबिज हो गए। जिला प्रशासन की ओर से छह सदस्यीय टीम ने इस मामले में जांच की तो हकीकत सामने आई।
इस मामले में सदर तहसील के तत्कालीन अधिकारी व कर्मचारी भी लपेटे में आए हैं। अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में डीएम के आदेश पर क्षेत्रीय लेखपाल जयप्रताप सिंह गौर ने मेरखपुर निवासी भाजपा नेता (स्थानीय कार्यकर्ता) भगवती कुमार, उनके भाई नरेंद्र कुमार, देवेंद्र कुमार, रविशंकर समेत उनकी मां किशना देवी पर मुकदमा दर्ज कराया था।
उन्होंने तहरीर में बताया गया कि फर्जी प्रविष्टि के सहारे मेरखपुर निवासी शिवकुमार (भाजपा नेता के पिता) ने दशकों पहले इस जमीन को अपने नाम चढ़वा लिया था। यह करामात चकबंदी प्रकि्रया के दौरान की गई थी।
मामले में उपसंचालक चकबंदी की ओर से वर्ष 1992 में फर्जी प्रविष्टि की करामात को पकड़ा था। जिसकी सूचना कागजों में दर्ज की गई थी। खास बात यह भी सामने आई कि शिवकुमार की मौत के बाद भाजपा नेता व उनके तीन भाइयों समेत मां के नाम यह जमीन वरासत में चढ़ा दी गई। आरोप है कि तब उपसंचालक चकबंदी की ओर से दर्ज कराई गई जानकारी को छिपा लिया गया।
इधर, कई सालों बाद सदर एसडीएम की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय टीम ने मामला पकड़ में आने पर विरासत को रद्द किया। इस जमीन के इर्दगिर्द प्लॉटिंग का कारोबार खूब चल रहा है। जमीन की कीमत भी आसमान छू रही है। मुकदमे के बाद अब इस जमीन को सदर तहसील प्रशासन ने आरोपियों के नाम हटाते हुए दोबारा से ऊसर में दर्ज कराया है।
फर्जी प्रविष्टि के सहारे हथियाई गई 11.69 एकड़ जमीन से अब आरोपियों के नाम हटा दिए गए हैं। इस जमीन को ऊसर में दर्ज कर दिया गया है।-रणवीर सिंह, सदर तहसीलदार