उरई। शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्रशासन की सख्ती के चलते 3089 अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। जिसमें प्राथमिक स्तर की टीईटी में 1390 तथा उच्च प्र्राथमिक स्तर की टीईटी में 1699 अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। सुबह की पाली में प्राइमरी की टीईटी में शिक्षामित्रों ने खूब सिफारिशें लगवाईं लेकिन प्रशासन के सख्त रवैये से शांतिपूर्ण ढंग से परीक्षा सम्पन्न हुई।
मालूम हो कि शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्राथमिक स्तर की परीक्षा में 4934 तथा उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा में 10448 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। रविवार को आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्राथमिक स्तर की परीक्षा में 1390 तथा उच्च प्र्राथमिक स्तर की परीक्षा में 1699 परीक्षार्थी नदारद रहे। इसकी खास वजह यह मानी जा रही है कि शिक्षामित्रों को टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
जिसके चलते पेपर हल करने के लिए कई कोचिंग के सोल्वरों ने भी आवेदन किए थे, लेकिन प्रशासन की सख्ती के चलते परीक्षा केंद्रों पर मजिस्ट्रेटों की कड़ी निगरानी रही जिससे कई सोल्वरों ने परीक्षा में शामिल होना मुनासिब नहीं समझा। इतना ही नहीं इसकी एक खास वजह यह भी रही कि परीक्षा में सम्मिलित होने के लिये शैक्षिक योग्यता का अंतिम वर्ष का सर्टिफिकेट तथा प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, एक आईडी प्रूफ एवं एक फोटो प्रवेश पत्र के साथ लाना अनिवार्य था।
इस वजह से वह साल्वर भी परीक्षा नहीं दे सके, जिनके पास यह संबंधित दस्तावेज नहीं थे। रविवार को दो पालियों में टीईटी की परीक्षा होने की वजह से प्रशासन मुस्तैद दिखा। 10 साल से अधिक समय से नौकरी कर रहे शिक्षामित्रों ने बताया कि जब उन्होंने टीईटी का पेपर देखा तो पसीना आ गया। पेपर में गणित के पार्ट में कई कठिन प्रश्न थे कि उन प्रश्नों ने आधा समय खा लिया जिसके चलते पेपर को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला और कई प्रश्न छूट गए।
-प्रशासन की व्यवस्था रही चाक चौबंद, पेपर देख अभ्यर्थियों का छूटा पसीना
अमर उजाला ब्यूरो