औरैया। जनपद में पिछले तीन दिनों से अलग-अलग क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण मौसम पूरी तरह बदल गया है। इस बारिश से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली है। यह बारिश धान, मक्का और बाजरा जैसी खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है। दूसरी ओर, बारिश के बाद धूप निकलने से धान की फसल में कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका के चलते किसान खेतों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने में जुट गए हैं। बृहस्पतिवार को हुई बारिश के चलते जगह-जगह जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. राम पलट सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह बुधवार की तुलना में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान में एक-एक डिग्री की गिरावट है। उन्होंने बताया कि अगले 24 घंटे में करीब 10.7 मिमी बारिश होने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण तापमान में और गिरावट बनी रह सकती है। बताया कि बारिश धान की फसल के लिए सबसे अधिक लाभकारी है। पर्याप्त नमी मिलने से पौधों की बढ़वार अच्छी होगी।
किसानों के अनुसार धान की फसल में तना छेदक और पत्ती खाने वाले कीट सक्रिय हो रहे हैं। ऐसे में फसल को नुकसान से बचाने के लिए खाद डालने के साथ-साथ कीटनाशक दवाओं का भी छिड़काव किया जा रहा है। खेतों में पानी लबालब भर जाने से अब सिंचाई की चिंता खत्म हो गई है।
सड़क से लेकर मंडी और बिजली घर में हुआ जलभराव
अजीतमल। मुरादगंज कस्बा के भीखेपुर जाने वाले मुख्य मार्ग पर बृहस्पतिवार दोपहर बारिश के बाद जलभराव व कीचड़ फैल गया है। वहीं बाबरपुर स्थित सब्जी मंडी में भी जलभराव हो गया। अयाना स्थित बिजली उपकेंद्र में भी जलभराव हो गया।
मुरादगंज में स्थानीय लोगों ने बताया कि कीचड़ व जलभराव से उन्हें रास्ते से निकलने में काफी असुविधा होती है। कीचड़ के कारण बाइक सवार फिसलकर गिर रहे हैं। स्कूली बच्चों और राहगीरों को पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। बाबरपुर स्थित सब्जी में नालियां संकरी होने के कारण बारिश का पानी समय पर नहीं निकल पाया। इससे थोड़ी देर की बारिश में ही मंडी परिसर जलमग्न हो गया। बृहस्पतिवार को को बाजार का दिन न होने से भीड़ कम रही, अन्यथा सब्जी की खरीद-फरोख्त और लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होती।
उधर, अयाना विद्युत उपकेंद्र परिसर में जलभराव होने से कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उपकेंद्र तक जाने वाला रास्ता कच्चा होने के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। वहीं, पुलिया बंद होने से करीब 80 बीघा खेतों में भी पानी भर गया है। किसानों का आरोप है कि अयाना-बीझलपुर मार्ग के निर्माण के दौरान ठेकेदार ने पहले से बनी पुलिया को हटाने के बाद नई पुलिया का निर्माण नहीं कराया। इससे जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से हर बरसात में करीब 80 बीघा कृषि भूमि में पानी भर जाता है। (संवाद)
धान की फसल में कीटनाशक का छिड़काव करते किसान। संवाद