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पूरे साल 16 परिवारों को मिला 100 दिन काम

Sun, 26 Feb 2017 11:46 PM IST
auraiya,amar ujala beauro
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मनरेगा - फोटो : यमुनानगर
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100 दिन रोजगार की गारंटी का दंभ भरने वाली मनरेगा योजना अपना वायदा पूरा नही कर पा रही है। हालत यह है कि सत्र बीतने को है और पूरे जिले में सिर्फ 16 परिवारों को ही 100 दिन काम मिल सका। इसमें चार ब्लाक तो ऐसे है जहां एक भी परिवार को सौ दिन काम नही मिला।
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गांव में ही रोजगार देने के लिए बनी मनरेगा की हालत दिन पर दिन पतली होती जा रही है। ऐसी हालत में ग्रामीण मजदूरों का मनरेगा से मोह भंग होने लगा है। मजदूर काम की तलाश में शहर व प्रांत छोड़ रहे हैं। नोटबंदी के बाद बाहर प्रांतों से मजदूर गांव आ गए थे। एकाएक मनरेगा में काम मांगने वालों की संख्या में इजाफा हो गया था। मगर प्रशासन सभी को काम नही दे पाया। जिले में एक लाख 20 हजार 842 जॉबकार्ड धारक हैं। हर हाथ को काम नसीब नही है।

बीते सत्र 2015-16 में मनरेगा ने 1068 परिवारों को सौ दिन का काम दिया था। मगर इस सत्र खत्म होने में एक महीना बचा है और पूरे जिले में सिर्फ 16 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिल सका। इसके अलावा चार ब्लाक तो ऐसे है जिनमें एक भी परिवार को सौ दिन का काम नही मिला। अजीतमल सिर्फ एक परिवार को सौ दिन का काम दे सका। जबकि मनरेगा में काम तेज करने को आदेश दर आदेश दिए जाते रहे मगर मनरेगा अपनी चाल नही पकड़ सकी।
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ब्लाकों में 100 दिन काम देने की स्थिति
अछल्दा - शून्य, अजीतमल- एक, औरैया- शून्य, भाग्यनगर- छह, बिधूना -शून्य, एरवाकटरा- नौ, सहार- शून्य।

ब्लाक     काम मांगा                      मिला काम
अछल्दा -   5443                     4447
अजीतमल - 5999                     5422
औरैया        7365                   6498
भाग्यनगर     4058                    5437
बिधूना        6339                    5327
एरवाकटरा    4700                     3768
सहार         5718                      4608

मनरेगा में बजट न होने से कुछ महीने काम रुका रहा। मगर केंद्र से बजट जारी होते ही काम में तेजी लाई गई है। सभी ब्लाकों को निर्देश हैं कि मनरेगा की योजनाओं में तेजी लाकर काम मांगने वाले परिवारों का काम मुहैया कराएं।
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                                जीपी गौतम
                             परियोजना निदेशक
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