अतीक अहमद ने 1996 में शाइस्ता परवीन से निकाह किया। इन दोनों के पांच बेटे हैं- मोहम्मद उमर, मोहम्मद अली, असद अहमद और दो नाबालिग बेटे। इसके पांच में से चार बेटों का भी आपराधिक रिकॉर्ड है। दो बेटे- मोहम्मद उमर और मोहम्मद अली जेल में बंद हैं। जबकि, दो बेटे- मोहम्मद अहजम और मोहम्मद आबान के बारे में पता नहीं चल पाया कि ये अभी कहां हैं।
वहीं अतीक का बेटा असद अहमद उमेश पाल हत्याकांड का आरोपी था और 24 फरवरी को हुए हत्याकांड के बाद से पुलिस उसे ढूंढ रही थी। 13 अप्रैल को यूपी एसटीएफ ने झांसी में असद का एनकाउंटर कर दिया है। असद पर पांच लाख का इनाम घोषित था।
दो लाख के इनामी मोहम्मद उमर पर रंगदारी का आरोप है। पिछले साल अगस्त में उसने सीबीआई के सामने सरेंडर कर दिया था। वहीं, मोहम्मद अली पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। जबकि, दो बेटों को उमेश पाल हत्याकांड के मामले में पुलिस ने हिरासत में लिया है। रोचक बात यह है कि पुलिस इससे साफ इनकार कर रही है लेकिन इनकी मां शाइस्ता परवीन का कहना है कि दोनों को पुलिस अपने साथ लेकर गई थी और तब से ही दोनों का कोई सुराग नहीं है।
साल की शुरुआत में ही अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुई है। उनके अलावा बेटे अहजम अहमद ने भी बसपा की सदस्यता ली है। चर्चा थी कि बसपा उन्हें प्रयागराज मेयर पद का प्रत्याशी बना सकती हैं लेकिन उमेश पाल की हत्या के बाद मायावती ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इससे इनकार कर दिया।
बता दें कि यूपी विधानसभा चुनाव से पहले शाइस्ता परवीन ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ज्वाइन किया था। खुद ओवैसी ने लखनऊ में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। इसके बाद उन्हें चुनाव में उम्मीदवार भी बनाया गया लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। शाइस्ता भी उमेश पाल हत्याकांड में फरार चल रही है और उस पर पुलिस ने हाल ही में इनाम दोगुना करते हुए 50 हजार रुपये कर दिया है।
अतीक के भाई अशरफ का सफरनामा
2004 के आम चुनाव में फूलपुर से सपा के टिकट पर अतीक अहमद ने लोकसभा चुनाव जीत और सांसद बन दिल्ली आ गए। इसके बाद इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट खाली हो गई। इस सीट पर हुए उपचुनाव में सपा ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को टिकट दिया था। लेकिन बसपा ने उसके सामने राजू पाल को खड़ा किया। उस उपचुनाव में बसपा प्रत्याशी राजू पाल ने अतीक अहमद के भाई अशरफ को हरा दिया था। इस हार को अशरद ही नहीं बल्कि अतीफ भी पचा नहीं पाया।
उपचुनाव में जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने राजू पाल की कुछ महीने बाद ही 25 जनवरी, 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में देवी पाल और संदीप यादव की भी मौत हुई थी। दो अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस हत्याकांड में सीधे तौर पर सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ का कनेक्शन सामने आया था। फिलहाल अशरफ बरेली जेल में बंद है।