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ढाई साल की लव स्टोरी आंगन में हुई दफन

Tue, 16 Jul 2013 08:48 AM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
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ढाई साल पहले यह लव स्टोरी एक मिस्ड कॉल से शुरू हुई थी। ढाई साल में यह परवान चढ़ी और प्रेमिका के कत्ल के साथ ही खत्म भी हो गई।
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पुलिस गुमशुदा प्रेमिका की सात महीने तक तलाश करती रही, लेकिन उसकी मौत से जब पर्दा उठा तो प्यार का खौफनाक चेहरा सामने आया। प्रेमिका का कंकाल प्रेमी के आंगन से मिला।

हरियाणा के महेंद्रगढ़ के डीएसपी अनूप सिंह दहिया के अनुसार, कोथर की रहने वाली सुनीता के पिता चंद्रभान ने मार्च में बेटी के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी महेंद्रगढ़ के डिग्री कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। वह दिसंबर से लापता है।
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इस पर मोबाइल सर्विलांस के जरिये पुलिस अलीगढ़ के नलकूप कॉलोनी निवासी अजीत पुत्र यदुनाथ सिंह तक पहुंची। मूल रूप से चिकावटी लोधा निवासी अजीत के पिता नलकूप विभाग में सेवारत थे और अजीत आईटीबीपी में था, लेकिन दो साल पहले बन्नादेवी में अपहरण के मामले में फंसने के बाद से वह निलंबित चल रहा था।

परिवार में मां की मौत के बाद पिता और छोटा भाई, बीवी व दो बच्चे रहते हैं, लेकिन अजीत का सुराग पुलिस को नहीं लगा। पुलिस ने जब दबाव बनाया तो इसी माह अजीत ने महेंद्रगढ़ में सरेंडर कर दिया।

सुनीता की हत्या
डीएसपी के अनुसार, जब अजीत को रिमांड पर लिया गया तो पहले उसने बताया कि युवती को आगरा में बेच दिया। फिर बताया कि जवां नहर में फेंक दिया। फिर तीसरी कहानी बताई कि गांव में चाचा के नलकूप के पास दफना दिया। चाचा को भी हिरासत में ले लिया गया।

इसके बाद पुलिस ने अजीत को रविवार को फिर चार दिन की रिमांड पर लिया। पूछताछ में उसने सुनीता की हत्या की बात कबूल कर ली। सोमवार सुबह हरियाणा पुलिस भी यहां पहुंची। बन्नादेवी पुलिस की मदद से डीएम से अनुमति लेकर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शाम को कंकाल रूपी शव उसके घर के आंगन से निकाला गया।

ढ़ाई साल की लव स्टोरी
अजीत के अनुसार, एक दिन अचानक सुनीता की मिस्ड कॉल आई तो उसने पलटकर कॉल किया। इसके बाद वह सुनीता के पीछे पड़ गया और खुद को अविवाहित बताते हुए कहा कि वह अमीर परिवार से ताल्लुक रखता है और बड़ी कंपनी में अफसर है।

सुनीता उसकी बातों में आ गई और दोनों फोन पर ही जुड़े रहे। कई बार मिलना-जुलना भी हुआ। फिर दोनों नोएडा आ गए और यहां किराये के कमरे में रहने लगे। इसी बीच एक दिन अजीत की पत्नी का फोन आया तो सुनीता ने रिसीव कर लिया। बस वहीं से पूरा भेद खुल गया।
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इस पर सुनीता और अजीत में झगड़े शुरू हो गए। अजीत अब उससे छुटकारा पाना चाह रहा था। एक दिन उसे मौका मिल गया, उसके पिता किडनी की बीमारी के चलते दिल्ली में इलाज कराने गए थे।

छोटा भाई भी उनके साथ गया था। बीवी बच्चों को लेकर कहीं रिश्तेदारी में गई थी। उसी दिन वह सुनीता को अपने घर ले आया और यहां लाकर उसकी हत्या कर दी।
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