अमरोहा। स्वयं सहायता समूह को लोन देने के मामले में गंभीर लापरवाही सामने आई है। बैंक शाखाएं और एनआरएलएम संयुक्त रूप से कदम उठाने को भी तैयार नहीं है। साल बीतने को है, लेकिन क्रेडिट लिंकेज यानी लोन की प्रगति में सुधार नहीं आ सका है। अभी लक्ष्य के सापेक्ष 36 प्रतिशत समूह की फाइल स्वीकृत हो सकी है। इसके अलावा बैंक शाखाओं में 113 फाइल लंबित है। इन पर निर्णय लिया जाना बाकी है।
केंद्र सरकार ने स्वयं सहायता समूह के जरिये महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही है। स्वयं सहायता समूह का गठन करना है। ताकि महिलाओं का सशक्तिकरण हो सके। लोन के रुपये से महिलाएं सिलाई, खेती, ब्यूटी पॉर्लर, मोमबत्ती निर्माण, पापड़ समेत अन्य कार्य कर सकती है। वर्ष 2019-20 में 377 समूह के गठन का लक्ष्य आवंटित हुआ। यहीं से लापरवाही शुरू हो गई। लक्ष्य के सापेक्ष 249 फाइल भेजी गई। बैंक शाखाओं ने भी जमकर लापरवाही बरती। अब तक महज 136 फाइल स्वीकृत हो सकी है, जबकि 113 फाइल लंबित है, लेकिन जिले में समूह के क्रेडिट लिंकेज की प्रगति बहुत खराब है। समूह के क्रेडिट लिंकेज के लिए फाइल की स्वीकृति में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बैंकों की टाल मटोल सामने आई है।
तीन महीने में आपस में लोन, पांच साल तक प्रत्येक बार एक लाख
अमरोहा। स्वयं सहायता समूहों का क्रेडिट लिंकेज बैंकों द्वारा विभिन्न अवधि में उपलब्ध कराई जाती है। पंच सूत्र का पालन करने वाले समूह को बैंक लोन देते हैं। तीन अवधि तक सामाजिक और आर्थिक जरूरत को पूरा करती है। इसके बाद 15 हजार रुपये की रिवॉल्विंग फंड मिलती है। इसके बाद समूह अपना स्वयं को रोजगार या आपस में लोन कर सकता है। निर्धारित अवधि में भुगतान पर कैश क्रेडिट लिमिट बढ़ा सकते हैं। पांच साल में प्रत्येक साल एक-एक लाख रुपये मिल सकते हैं।
न्यूनतम 10 और अधिकतम 20 सदस्य
अमरोहा। स्वयं सहायता समूह का गठन 10 सदस्य मिला कर हो सकता है। इसके चलते अमूमन 12 से 13 सदस्य बनाए जाते हैं। इसके अलावा अधिकतम 20 महिला शामिल हो सकती हैं।