अमरोहा। छह साल के मासूम बेटे की गवाही ने मृत पिता को इंसाफ दिला दिया। विवाहेतर संबंधों का विरोध करने पर पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की थी। अदालत में मासूम बेटे ने हत्या की पूरी कहानी को बयान किया। जिसके बाद अदालत ने पत्नी और उसके प्रेमी को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर जहूर हसन निवासी दिलशाद हुसैन की दुपट्टे से गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। उसकी पत्नी खुशमिना उर्फ बुनियादी ने शोर मचा दिया था कि बदमाशों ने पति की हत्या की है, लेकिन हत्या की पूरी वारदात को उसके छह साल के बेटे ने देख लिया था। मौके पर पहुंची पुलिस और परिजनों को मासूम ने हत्या की पूरी कहानी बता दी। उसने मां खुशमिना उर्फ बुनियादी और अहमद अली पर हत्या करने का आरोप लगाया। दिलशाद के भाई आजाद की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया था। इसके बाद दोनों जमानत पर जेल से बाहर आ गए।
मुकदमे की सुनवाई एडीजे प्रथम की अदालत में विचाराधीन था। छह माह पूर्व इस मामले के चश्मदीद छह वर्षीय बेटे की गवाही हुई। गवाही के दौरान जिले भर की फोर्स भी मौजूद थी। बेटे ने भरी अदालत में मां और हत्या में लिप्त उसके प्रेमी के घटनाक्रम को बयान किया। जिसके बाद पूरा मामला साफ हो गया था। बुधवार को एडीजे प्रथम राकेश कुमार चतुर्थ ने अभियुक्तों का साक्ष्य के आधार पर खुशमिना उर्फ बुनियादी और उसके प्रेमी अहमद अली को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने की स्थिति में एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास दिया जाएगा।
रिश्तों के विश्वास का कत्ल
अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता सर्वेश कुमार शर्मा और बसंत सैनी ने पक्ष रखा। बुधवार को सजा के प्रश्न पर अभियोजन की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि जीवन में पति-पत्नी का रिश्ता ही ऐसा रिश्ता है जो दो अंजान लोगों को जीवनभर के लिए एक कर देगा। आप दुश्मन से सचेत रह सकते हैं। लेकिन अपना जीवन, गृहस्थी की जिम्मेदारी सब कुछ जिसके साथ सौंप दिया उससे सचेत क्यों रहें। ऐसे में यदि उसकी ओर से रिश्तों के विश्वास का कत्ल एक साधारण व्यक्ति की निगाह में सबसे बड़ा अपराध है। इस पक्ष को अदालत ने तर्कपूर्ण मानते हुए उम्रकैद की सजा मुकर्रर की।