यह घटना वर्ष 2013 में हुई थी। आदमपुर थानाक्षेत्र के जंगल में चादर में लिपटी हुई लाश मिली थी। मृतक के सिर पर गोली लगने का निशान था। हत्या दूसरी जगह करने के बाद शव को घटनास्थल पर फेंका गया था। इस मामले में खेत मालिक विक्रम सिंह ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा आदमपुर थाना (वर्तमान में रहरा थाना) में दर्ज कराया था। करीब 15 दिन बाद मृतक की पहचान दिल्ली निवासी मुस्तकीम अहमद के रूप में हुई थी। मुस्तकीम अहमद मुरादाबाद के कटघर थानाक्षेत्र के रहमत नगर में किराए के मकान में रहता था। जबकि, उसकी पहली पत्नी शबनम और बच्चे दिल्ली में रहते थे।
16 मार्च 2013 को मुस्तकीम अहमद पत्नी शबनम व बच्चों के पास से मुरादाबाद आया था। इसके बाद वह गायब हो गया। आठ अप्रैल 2013 को मुस्तकीम की पत्नी शबनम ने फोन पर संपर्क किया तो बात नहीं बात नहीं हुई। मुस्तकीम का फोन बंद आ रहा था। 15 अप्रैल 2013 को शबनम देवर नईम अहमद के साथ मुरादाबाद के कटघर स्थित मकान पर पहुंची। यहां खाना बनाने वाली रहमत जहां से जानकारी की तो उसने 17 मार्च 2013 को मुस्तकीम के काम पर जाने की बात बताई। इसके बाद शबनम और नईम मुरादाबाद के कटघर थाना पहुंचे तो यहां एक पंपलेंट को देखकर अचंभित रह गए, जिसमें मुस्तकीम की फोटो चस्पा थी।
पुलिस से जानकारी करने के बाद शबनम और नईम अहमद आदमपुर थाने पहुंचे। जानकारी करने पर पता चला कि मुस्तकीम की हत्या कर दी गई है। पहली पत्नी शबनम और भाई नईम ने कपड़ों से उसकी पहचान की। पुलिस की छानबीन के दौरान पता चला कि घर पर खाना बनाने वाली रहमत जहां से मुस्तकीम ने शादी कर रखी थी। जबकि, रहमत जहां के पहले पति का नाम हनीफ है और इसके बाद रहमत जहां ने साल 2006 में मिंजार से दूसरा विवाह किया था। वहीं, साल 2010 में मिंजार से तलाक के बाद रहमत जहां मुस्तकीम के संपर्क में आई थी।
दोषी रहमत के आधार पर पति का नाम मुस्तकीम अंकित था
हत्या के बाद रहमत जहां से मिले आधार कार्ड में उसके पति का नाम मुस्तकीम अंकित था। पुलिस की छानबीन में यह भी सामने आया कि मुस्तकीम ने रहमत जहां के नाम पर मुरादाबाद में एक प्लॉट खरीदा था। लेकिन, इस प्लॉट को रहमत जहां ने बैनामे में अपने पहले पति का नाम हनीफ अंकित करा दिया था। जिसे लेकर मुस्तकीम और रहमत जहां के बीच विवाद हो गया था। बस इसी बात को लेकर रहमत जहां ने अपने दूसरे पति मिंजार से मिलकर मुस्तकीम की हत्या की साजिश रच डाली। इसके बाद दोनों ने मुस्तकीम की गोली मारकर हत्या कर दी और शव को चादर में लपेटकर रहरा थानाक्षेत्र के जंगल में फेंक दिया था।
दोनों दोषी जमानत पर थे जेल से बाहर
हत्याकांड का खुलासा करने के बाद पुलिस ने रहमत जहां और उसके दूसरे पति मिंजार को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। फिलहाल दोनों जमानत पर जेल से बाहर थे। इस मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट द्वितीय अरविंद कुमार शुक्ला की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन बंसल पैरवी कर रहे थे। मंगलवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की और साक्ष्य व सबूतों के आधार पर मृतक की पत्नी रहमत जहां और उसके दूसरे पति मिंजार को दोषी करार दिया। साथ ही दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई और एक लाख का जुर्माना लगाया है।