अमरोहा के लक्ड़ा चुंगी पर पंजाब नैशनल बैंक के बाहर शादी कार्ड दिखाते पिता
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नोटबंदी का असर चौतरफा नजर आ रहा है। अवैध करेंसी नई कराने के लिए दिन निकलते ही बैंकों के बाहर लोगों की लाइन लग जाती है। इसका खासा असर आम आदमी पर साफ नजर आ रहा है। जिन घरों में शादी का माहौल उनके चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं। पैसों के इंतजाम की उलझन ने उन्हें चिंता में डाल दिया है।
ऐसा ही एक मामला शुक्रवार को प्रकाश में आया। बेटी के निकाह से एक दिन पूर्व जब बैंक में ढाई लाख की रकम जमा हुई तो उस पिता की आंखों में उस समय आंसू छलक उठे। दरकती जुबां पर उसके यही बात थी कि लाज बच गई। शनिवार को यानी कल उसकी बेटी का निकाह सकुशल संपन्न हो जाएगा। बारातियों के स्वागत में कमी नहीं आयेगी।
नगर के मोहल्ला मुल्लाना निवासी जावेद हाशमी नगर के एक इंटर कॉलेज में कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं। उनके चार बेटी हैं। सबसे छोटा बेटा दस साल का है। बड़ी बेटी का रिश्ता उन्होंने नगर के ही एक परिवार में तय किया है। काफी दिनों से परिवार में तैयारी चल रही थीं। बैंक्वेट हाल आदि बड़े काम पहले ही बुक कर लिये गए।
फिलहाल सिर पर अभी बड़ा खर्चा होना बाकी रह गया। 19 नवंबर को निकाह होना है। जिसके लिए तीन दिन से वह ढाई लाख रुपये की पुरानी करेंसी जमा करने के लिए लक्ड़ा पीएनबी बैंक शाखा के चक्कर काट रहे थे। कानों से सुनाई नहीं देता और बेटा छोटा है। लाइन में लगने के बाद भी नंबर नहीं आ रहा। शुक्रवार को जब अखबारों में खबर सुर्खियां बनी की शादी के लिए मोहताज नहीं होना पड़ेगा।
इस पर मोहल्ले के कुछ लोग उन्हें कलेक्ट्रेट ले गए, जहां एडीएम महमूद आलम अंसारी ने ये कह कर पल्ला छाड़ लिया कि उनके पास इस तरह का कोई आदेश नहीं आया है, इसके बाद वह अपर पुलिस अधीक्षक एनपी सिंह से गुहार लगाई।
इस पर एएसपी ने मामले को संगीनता से लिया और अखबारों की सुर्खियों का हवाला देकर पीड़ित पिता के ढाई लाख रुपये बैंक में जमा कराने का भरोसा दिलाते हुए चौकी प्रभारी को आदेशित किया। पुलिस कर्मी ने बैंक पहुंच कर ढाई लाख की नगदी जमा कराई। वहीं शाखा प्रबंधक ने शनिवार सुबह बैंक से कैश दिये जाने का भरोसा देकर घर भेज दिया। वहीं जावेद हाशमी का कहना है कि बैंक से रकम समय से नहीं मिल सकी तो इधर उधर से इंतजाम कर लिया जाएगा।