केंद्र सरकार द्वारा धान समेत 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का किसान नेताओं ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकार ने धान और खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाकर अच्छा काम किया है। इससे किसानों को राहत मिलेगी। हालांकि, गन्ने के दाम में बढ़ोतरी न होने पर किसानों ने नाराजगी भी जताई। उन्होंने सरकार से गन्ने का समर्थन मूल्य भी बढ़ाने की मांग की है।
- केंद्र सरकार ने धान और खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाया है। लेकिन गन्ना उत्पादकों के लिए सरकार के मन में कोई भी अच्छी भावना नहीं है। गन्ना क्षेत्र की मुख्य फसल है। गन्ना पेराई सत्र बीत गया, लेकिन सरकार ने गन्ने का रेट नहीं बढ़ाया। सरकार को गन्ने का रेट बढ़ाने की भी घोषणा करनी चाहिए। - विजयपाल सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाकियू टिकैत
- सरकार ने धान और खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है। सरकार का फैसला स्वागत योग्य है। लेकिन, सरकार को गन्ने का रेट बढ़ाने की याद नहीं आई। इसको लेकर गन्ना किसानों में नाराजगी है। सरकार को एमएसपी पर कानूनी गांरटी का प्रावधान करना चाहिए। - डूंगर सिंह, मंडल अध्यक्ष, भाकियू असली
- धान और खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाना स्वागत योग्य है। लेकिन, सरकार ने दो साल से गन्ने का रेट नहीं बढ़ाया है। गन्ने का मूल्य करीब 450 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। सरकार को गन्ने का रेट भी बढ़ाना चाहिए। साथ ही चीनी मिलों पर गन्ना मूल्य भुगतान की पाबंदी का भी प्रावधान करना चाहिए। - कैलाश त्यागी, राष्ट्रीय सलाहकार, भाकियू लोकहित
- धान समेत 14 खरीफ फसलों की एमएसपी बढ़ाया जाना स्वागत योग्य है। सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य के बारे में कानूनी गारंटी का प्रावधान होना चाहिए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में गन्ने की फसल होती है। सरकार को गन्ना किसानों की परेशानी को ध्यान में रखना होगा। साथ ही गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए। - सुमित नागर, राष्ट्रीय सचिव, भाकियू लोकशक्ति