बज्म-ए-नकहत के तत्वावधान में ऑपरेशन सिंदूर शीर्षक से मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें शायरों ने एक से बढ़कर कलाम पेश करके खूब दाद हासिल की।
बृहस्पतिवार रात आईएम इंटर कॉलेज में मुशायरे की शुरुआत कर्नाटक से आए अब्दुल रज्जाक उर्फ बाबा चौधरी ने शमा रौशन कर की। शुरुआत नौशाद संभली ने नात-ए-पाक से की। शहजादा गुलरेज रामपुरी ने पढ़ा, बजाए सीने के आंखों में दिल धड़कता है, ये इंतजार के लम्हे अजीब होते हैं। फखरी मेरठी ने ऐसे पढ़ा, किसी कमजर्फ के हिस्से में नहीं आ सकते, हम समंदर हैं कटोरे में नहीं आ सकते। नय्यर जलालपुरी ने यू पढ़ा...बुन रहा था जो प्यार का स्वेटर, वो सलाई में ऊन छोड़ गया।
हाशिम फिरोजाबादी ने कहा, जिनको पढ़ने से फसादों को हवा मिलती हो, ऐसे अशआर से बेहतर है कि गूंगा हो जाऊं। निकहत अमरोहवी ने यू कहा, मैं क्या हूं कौन हूं इससे गरज नहीं कोई, यही बहुत है के हिंदुस्ता की बेटी हूं। सलीम अमरोहवी ने ऐसे कहा, में जितना सब्र करता जा रहा हूं, वो उतना आजमाता जा रहा है। खुर्शीद हैदर मुजफ्फर नगरी इस तरह कहा, किसी की ताजपोशी हो रही है किसी का सर उतारा जा रहा है। डॉ. जमशेद कमाल पढ़ा, कहां जाना है किस सिमत उसे वो अपना रस्ता भूल गया, इतने चेहरे बदले उसने असली चेहरा भूल गया।
इसके अलावा कशिश वारसी, कलीम समर, वसीम राजपुरी, आदि ने अपने-अपने कलाम पेश किए। अध्यक्षता वरिष्ठ शायर शहजादा गुलरेज रामपुरी ने की। वहीं, आईएम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डाॅ. जमशेद कमाल व फाखरी मेरठी विशिष्ट अतिथि रहे। इसके बाद स्मृति चिन्ह एवं शाल भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया गया। इस दौरान मुस्लिम कमेटी के अध्यक्ष इकबाल खां, नुदरत नवाज, कमर नकवी, खुर्शीद अनवर, मोहम्मद अहमद जैदी आदि मौजूद रहे। कन्वीनर नकहत अमरोहवी ने सभी का आभार अदा किया।