बिहारीपुर में वन विभाग के जंगल पर सर्वे कर रही टीम को ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने रोक दिया। राजस्व लेखपाल की मौजूदगी में सर्वे कराए जाने की बात कहते हुए हंगामा कर दिया। हालांकि सर्वे टीम ने करीब 28 हेक्टेयर यानी साढे़ चार सौ बीघा जंगल को अवैध कब्जायुक्त दर्शाते हुए जमीन पर निशान भी लगा दिए।
अभी और भी सर्वे कार्य बाकी है। माफिया के हड़काने पर वन अफसरों को सर्वे कार्य बीच में ही छोड़कर बैकफुट पर आना पड़ा। जंगल पर कब्जे में माफिया के राजस्व लेखपालों से भी मिलीभगत के संकेत मिले हैं।
हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव बिहारीपुर के जंगल में करीब छह हजार बीघा वन विभाग का जंगल है। इसमें से करीब 1350 बीघा जंगल पर माफियाओं ने कब्जा जमा रखा है। उधर, गांव जेबड़ा ऐतमाली के करीब चार हजार बीघा जंगल में से तीन सौ से अधिक बीघा जंगल पर दबंगों ने अवैध कब्जा कर रखा है।
जंगल की भूमि पर कब्जा कर फसलें उगाई जा रही हैं। जंगल पर अवैध कब्जे का मामला अमर उजाला अखबार ने प्रमुखता से उठाया तो वन अफसरों की नींद उड़ गई। अफसरों ने बार-बार मौके पर पहुंचकर मुआयना करने का मन बनाया, लेकिन कोई न कोई बहाना बनाकर लापरवाही की जाती रही है। बुधवार को बिहारीपुर के जंगल में सर्वे टीम वन विभाग के जंगल का सर्वे करने पहुंची थी।
यहां पर 28 हेक्टेयर यानी करीब साढे़ चार सौ बीघा जंगल पर अवैध कब्जे की पुष्टि करते हुए निशान भी लगा दिए गए। इस बीच बिहारीपुर का ग्राम प्रधान ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंच गया और सर्वे को गलत ठहराते हुए हंगामा कर दिया। कहा कि वन विभाग की टीम का सर्वे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राजस्व लेखपालों के बगैर सर्वे नहीं हो सकता है। फोन पर माफियाओं के हड़काने पर अफसर बैकफुट पर आ गए और उन्हें सर्वे कार्य बीच में छोड़कर वापस लौटना पड़ा। इससे यह तो साफ होता है कि वन विभाग के जंगल पर वन अफसरों के अलावा राजस्व लेखपाल भी कटघरे में खड़े दिखाई दे रहे हैं।