यूपीसीडा औद्योगिक क्षेत्र में करीब तीन करोड़ रुपये से काम कराएगा। नाली, नाला निर्माण के साथ प्रतिदिन सफाई कराई जाएगी। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कूड़े-कचरे का निस्तारण कराने की जिम्मेदारी भी यूपीसीडा की होगी। अफसरों का दावा है कि इस समय झाड़ियों में ढके यूपीसीडा की तस्वीर कुछ दिनों बाद बदली नजर आएगी।
गजरौला में 1985 से औद्योगिक इकाइयों की स्थापना शुरू हुई। इस समय फेज-1, फेज-2 और फेज-3 में करीब 29 फैक्टरी हैं। इसके अलावा दूध की डेयरी, आटा मिल, उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण का गोदाम, दो आईटीआई संस्थान, पुलिस चौकी, बिजली विभाग की कार्यशाला, बीएसएनएल का ऑफिस, एफसीआई का गोदाम और कई ट्रांसपोर्ट भी हैं। औद्योगिक क्षेत्र में करीब पांच हजार की आबादी निवास करती है। 15 हजार से अधिक श्रमिक काम करते हैं।
पहले फैक्टरी या औद्योगिक क्षेत्र में विकास कार्य उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) द्वारा किया जाता था लेकिन बाद में इसे नगर पालिका को सौंप दिया गया था। हालांकि, सितंबर 2024 में यूपीसीडा ने फैक्टरी क्षेत्र पालिका से यह कहकर वापस ले लिया कि वह कार्य नहीं करा रही है जबकि पालिका के मुताबिक उनके द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के विकास में छह करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए।
अब यूपीसीडा करीब तीन करोड़ रुपये से औद्योगिक क्षेत्र में काम कराएगी। साथ ही औद्योगिक इकाइयों का कूड़ा इकट्ठा किया जाएगा। जिसका अलग स्थान पर निस्तारण किया जाएगा। वायु प्रदूषण रोकने के लिए पानी का छिड़काव होगा। यूपीसीडा के सहायक प्रबंधक धर्मेंद्र कुशवाहा ने बताया कि इसकी टेंडर प्रकिया शुरू हो गई है। अगले सप्ताह काम शुरू कर दिए जाएंगे।