अमरोहा। हादसे में तेंदुए की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले गजरौला क्षेत्र और रजबपुर क्षेत्र में दो तेंदुए हादसे में जान गंवा चुके हैं, जबकि अलग-अलग स्थानों पर तीन तेंदुओं की शव मिल चुके हैं।
वन विभाग ने दो तेंदुए को संदिग्ध हालत में मौत होने का दावा किया था, जबकि एक तेंदुए की मौत आपसी लड़ाई को बताया था। इतना ही नहीं दो तेंदुओं को भीड़ ने घेरकर मौत के घाट उतार दिया था।
एक सितंबर 2021 को अमरोहा देहात थानाक्षेत्र के सुनपुरा गांव में रहने वाले आदेश शर्मा के बाजरे के खेत में मादा तेंदुए का शव पड़ा मिला था। इससे पहले कई दिनों से तेंदुआ देखे जाने से क्षेत्र के लोगों में दहशत बनी हुई थी।
लगातार आसपास के जंगल में तेंदुआ देखा जा रहा था। मृतक तेंदुए के गले पर घाव मिले थे। जबकि, एक अन्य तेंदुए को जंगल में घूमते हुए देखा गया था। जिसके बाद वन अधिकारियों ने आपस की लड़ाई की मादा तेंदुए की मौत होने की बात कही थी। नौ मई 2023 को नौगांवा सादात के बाकीपुर गांव में कुत्ते का शिकार करके ले जा रहे तेंदुआ को ग्रामीणों ने उसे किसान महेश सिंह के बाजरे के खेत में घेर लिया था।
खेत की तलाशी लेने पर तेंदुए का जोड़ा और उनका शावक मिला। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की मदद से शावक को पकड़ लिया था। जबकि, तेंदुए का जोड़ा भाग निकला था। घायल अवस्था में शावक को वन विभाग के कार्यालय लाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। 09 जनवरी 2024 को गजरौला हाईवे पर ख्यालीपुर ढाल के सामने वाहन ने तेंदुए को टक्कर मार दी थी। मुंह पर चोट लगने से तेंदुए की मौके पर ही मौत हो गई थी।
तेंदुए के शव को सिहाली जागीर स्थित वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय में पोस्टमार्टम कराने के बाद अधिकारियों की मौजूदगी में उसे जला दिया गया था। 25 दिसंबर 2024 को नौगांवा सादात के नया गांव के पास खेत में आठ माह के तेंदुए का शव पड़ा मिला था। सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची और शव को डीएफओ कार्यालय लाया गया था। जहां तीन पशु चिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया था। तेंदुए के शरीर पर पंजों के घाव मिले थे। वन विभाग के अधिकारियों ने दूसरे तेंदुए से लड़ाई में मौत होने की आशंका जताई थी। दो जून 2025 को मंडी धनौरा के देहरा चक गांव निवासी सोविंदर सिंह सोमवार शाम करीब छह बजे खेत पर गए थे। उन्होंने मेड़ के पास एक तेंदुए का पड़ा देखा, जिसे देखकर वह घबरा गया। सोविंदर के शोर मचाने पर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण दौड़कर पहुंचे। इसके बाद वनकर्मी ने पास जाकर देखा तो तेंदुए की मौत हो चुकी थी।