आज के समय में ढोलक के लिए मशहूर अमरोहा किसी जमाने में अपनी हैंडलूम कारीगरी के लिए जाना जाता था। यहां कारीगरों की दस्तकारी से तैयार उत्पाद दूर देशों में भी खूब पसंद किए जाते थे। जब तक सरकार की सुविधाएं मिलती रहीं, तब तक यहां का एक बड़ा तबका इस लघु उद्योग को अपनाए हुए था। लेकिन, जैसे ही सरकार ने सुविधाओं से अपने हाथ खींचे, इससे जुड़े लोगों का भी धीरे-धीरे इससे मोहभंग होना शुरू हो गया।
लागत बढ़ती चली गई और मुनाफा कम होता गया। जिससे इस व्यवसाय से जुड़े लोगों ने भी इससे दूरी बना ली। जिसके बाद जिले में यह व्यवसाय धीरे-धीरे दम तोड़ता चला गया। लेकिन, इतने में भी इस व्यवसाय का टर्नओवर जिले में कम नहीं है। आंकड़ों की मानें तो हर साल इस व्यवसाय से 120 से 130 करोड़ रुपये का टर्नओवर होता है। लेकिन इसके बाद भी इसके व्यवसायी सुविधाएं मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर बाजार की कमी
नेशनल बुनकर हथकरघा औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति के अध्यक्ष परवेज आरिफ टीटू कहते हैं कि पहले की तरह हैंडलूम व्यवसायियों को बाजार की उपलब्धता मिलना चाहिए। पहले आसपास के जिलों में बाजार लगाने पर इससे जुड़े व्यवसायियों को सरकार की ओर से दस हजार रुपये की राशि दी जाती थी। लेकिन बाद में किसी वजह से वह बंद हो गई। बाजार भी लगने बंद हो गए। जिससे हैंडलूम कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा।
धागे पर बंद कर दी सब्सिडी
एनएचडीसी यानी नेशनल हैंडलूम डवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा पहले हैंडलूम कारोबारियों को धागे की खरीद पर सब्सिडी दी जाती थी। लेकिन, सरकार ने इस सब्सिडी को भी बंद कर दिया। जिससे बाद में धागे की खरीद भी महंगी होती गई। मजबूरी में धागे की खरीद दूसरे शहरों से करनी पड़ी। फिलहाल कच्चा माल पानीपत समेत दूसरे शहरों से खरीदना पड़ता है, जो काफी महंगी पड़ता है।
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डिजाइन सेंटर नहीं, लगानी पड़ती है वाराणसी की दौड़
हैंडलूम उत्पाद के लिए डिजाइन बेहद अहम है। इसी के कारण तैयार उत्पाद की अच्छी कीमत मिलती है। लेकिन स्थानीय स्तर पर कहीं भी डिजाइन सेंटर कर सुविधा नहीं है। इसके लिए कारीगरों को वाराणसी की दौड़ लगानी पड़ती है।
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नहीं बने बुनकर कार्ड
जिले में इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के बुनकर कार्ड भी नहीं बन सके हैं। व्यापारियों की मानें तो बुनकर कार्ड बनवाए जाने के लिए कई बार प्रयास किए गए। लेकिन औपचारिकताओं की कमी बताकर उनको टरका दिया जाता है। जिससे उनको सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
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हैंडलूम से जुड़े व्यापारियों के विकास के लिए सरकार को इस और ध्यान देना चाहिए। जरूरी सुविधाओं को भी बढ़ाना चाहिए। जिससे बचे हुए लोग भी अपने पुश्तैनी काम से जुड़े रहें। - परवेज आरिफ टीटू, अध्यक्ष, नेशनल बुनकर हथकरघा औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति
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