शौचालय की नगदी हड़पने को लेकर आवेदकों ने फर्जीवाड़ा कर डाला। अपना तो बनाया नहीं बल्कि किस्त हड़पने के लिए किसी और के शौचालय का फोटो लगाकर नगर पालिका प्रशासन को भेज दिया। सत्यापन के दौरान फर्जीवाड़े की पोल खुलकर सामने आ गई। अफसरों ने दूसरी किस्त पर रोक लगा दी है। पहले शौचालय का काम कराने को कहा है। उसके बाद ही किस्त जारी होगी।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर पालिका क्षेत्र को खुले में शौच मुक्त बनाने की कार्रवाई चल रही है। 1600 शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 1100 लोगों को दूसरी किस्त आवंटित की जा चुकी है। प्रत्येक शौचालय निर्माण को आठ हजार की नगदी मिल रही है। इसमें पहली किस्त चार हजार रुपये की है। दूसरी भी इतने की जारी होती है। धनराशि सीधे आवेदक के खाते में भेजी जाती है। सरकारी इमदाद को हड़पने का लोगों ने नया तरीका निकाला।
पहली किस्त के रूप में मिली धनराशि खर्च कर ली। दूसरी किस्त लेने के लिए किसी और के घर के शौचालय का फोटो खींचा और कागजों में लगाकर नगर पालिका प्रशासन के पास भिजवा दिया।
नगर पालिका अधिकारियों को ऐसे तकरीबन 12 फोटो पर शक हो गया। इनकी जब जांच कराई गई तो मौके पर गड्ढे नहीं मिले।
मसले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने आवेदकों को हड़काया। दूसरी किस्त पर पाबंदी लगा दी। पहले शौचालय बनवाने को गड्ढों खोदने व अन्य कार्रवाई कर दिखाने को कहा। इसके बाद ही दूसरी किस्त जारी करने की बात कही।
शहर में जितने भी शौचालय बन रहे हैं, उनका मौके पर जाकर निरीक्षण किया जा रहा है। कुछ आवेदकों ने गलत सूचना भेजी थी। जांच में स्थिति सूचना से जुदा मिली है। जब तक वह काम नहीं कराएंगे, तब तक दूसरी किस्त की धनराशि नहीं दी जाएगी। मनोज रस्तोगी, ईओ नगर पालिका परिषद