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तिगरी मेला : 300 कैमरे और दो ड्रोन से होगी निगरानी

Thu, 09 Oct 2025 02:20 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। बाढ़ के बाद बदली गंगा की जलधारा के कारण इस बार तिगरी मेले का स्वरूप भी बदल जाएगा। मेला चौड़ाई में कम और लंबाई में ज्यादा बसाया जाएगा। मेले की तैयारी शुरू हो गई हैं। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने खाका तैयार कर लिया है। मेले में आने वाले श्रद्धालु की सुरक्षा को लेकर खड़े इंतजाम किए जाएंगे। करीब बीस सेक्टर में बसने वाले तिगरी मिले में 300 सीसीटीवी कैमरों और दो ड्रोन से निगरानी की जाएगी।
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मेले में होने वाली हर गतिविधि पर पुलिस की नजर रहेगी। इसके लिए मेला कोतवाली में कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। सुरक्षा के लिए मुस्तैद पुलिसकर्मियों, अफसरों, मेले की देखरेख कर रहे सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों के बीच समन्वय एवं संपर्क (कनेक्टिविटी) बनाए रखने के लिए पुलिस इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। कंट्रोल रूम के 24 घंटे संचालन के लिए करीब 28 पुलिसकर्मियों का स्टाफ तैनात रहेंगे। मेले में सुरक्षा के लिए तैनात 250 पुलिसकर्मियों के पास कंट्रोल रूम के हैंडसेट रहेंगे। इसके अलावा घाट पर मुस्तैद फ्लड पीएसी, दमकलकर्मियों और घुड़सवार पुलिसकर्मियों को भी हैंडसैट दिए जाएंगे जिससे जरूरत पड़ने पर वह तुरंत मौके पर पहुंच सकें।



मालूम रहे कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एतिहासिक तिगरी धाम मेले में इस बार आस्था का अद्भुत संगम दिखाई पड़ेगा। सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। दिवाली के बाद कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा तिगरी में 30 से 35 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। सैकड़ों बीघा जमीन में तंबुओं की नगरी बसती है। एडीएम वित्त एवं राजस्व गरिमा सिंह ने बताया कि इस वर्ष मेला 25 अक्तूबर से छह नवंबर तक चलेगा। कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य स्नान पांच नवंबर की सुबह होगा।
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मेले में लगने वाले झूले, अस्थायी दुकानों की नीलामी करने के लिए नीलाम कमेटी गठित की गई है। इसके लिए डिप्टी कलक्टर ब्रजपाल सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को नामित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इस बार बाढ़ आने के बाद से गंगा का रुख बदला हुआ है। पिछले साल गंगा गढ़ की तरफ थी और बाढ़ का पानी भी कम था, लेकिन इस बार स्थिति बदल गई है। अबकी बार गंगा तिगरी की तरफ है और कटान भी हो रहा है। ऐसे में मेले को चौड़ाई में नहीं बल्कि लंबाई में बसाया जाएगा, यानी मेले का विस्तार गांव कांकाठेर और औसिता जगदेपुर की तरफ रहेगा।



यह है तिगरी मेले का इतिहास

वैसे तो तिगरी धाम में लगने वाले मेले का इतिहास सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं लेकिन यहां रहने वाले बुजुर्गों की माने तो कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले इस ऐतिहासिक मेले का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। प्राचीन काल से ही गंगा के दोनों तरफ मेले का आयोजन होना माना जाता है। मौजूदा समय में तिगरीधाम के मेले का आयोजन जिला प्रशासन करा रहा है। इससे पहले जिला पंचायत के द्वारा कराया जाता था। 1937 तक गंगा गढ़मुक्तेश्वर में स्थापित प्राचीन कालीन गंगा मंदिर की सीढ़ियों को छूते हुए बहती थी और इसी स्थान पर ही कार्तिक पूर्णिमा गंगा मेला लगता था।

इसके ठीक सामने ही गंगा के दूसरे छोर पर तिगरीधाम पर मेला आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगती थी। वक्त के साथ धीरे-धीरे गंगा अपना प्राचीन स्थान छोड़ती चली गई। अब गंगा मंदिर से गढ़ का मेला करीब 10 किलोमीटर दूर है और तिगरीधाम में गंगा इतनी ही दूर आई है। अब तिगरी गांव पहुंचते ही मेला शुरू हो जाता है। हालांकि, कांकाठेर रेलवे स्टेशन से अधिकांश श्रद्धालुु पैदल ही तिगरीधाम कूच करते हैं। वैसे यहां अब सवारी का बंदोबस्त भी हो चुका है। जो पैदल नहीं चलना चाहते, वे किराया देकर थ्री व्हीलर, घोड़ा तांगा में बैठकर मेले पहुंचते हैं।



बीते साल 35 लाख भक्तों ने गंगा में लगाई थी डुबकी

बीते साल ऐतिहासिक तिगरी गंगा मेले में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था। पहली बार 35 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई थी। कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर गंगा की रेती में चारों ओर श्रद्धालु ही श्रद्धालु नजर आ रहे थे। प्रशासन को इस साल भी 35 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
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