तिगरी मेले का शुभारंभ होने से ठीक दो दिन पहले एक हजार और पांच सौ का नोट बंद होने का असर मेले पर भी पड़ा। गत वर्ष की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं का ग्राफ गिरा हुआ नजर आया। छुट्टा रुपये न होने के कारण श्रद्धालुओं ने बहुत कम मेले में खरीदारी की। मेले में खरीदारी न होने से दुकानदारों के चेहरे लटके रहे। बोले पहली बार ऐसा हुआ हैै जो खर्चा भी नहीं निकला है।
तिगरी मेले में इस बार भी हर साल की तरह पच्चीस लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मेले से ठीक दो दिन पहले एक हजार और पांच सौ के नोट बंद किए जाने के कारण लोगों के अरमानों पर पानी फिर गया है। इस घोषणा के बाद तिगरी मेले के लिए जा रहा श्रद्धालुओं के सैलाब में गिरावट आ गई।
मेले में खर्चा कैसे होगा। इसको लेकर श्रद्धालु उलझन में पड़ गए। नोट बंद होने पर परिवारों में आर्थिक तंगी छा गई। तमाम परिवारों ने मेले की ओर जाने का प्रोग्राम ही निरस्त कर दिया। जो लोग मेले में डेरा डाल चुके थे वे छोटे नोटों की व्यवस्था करने में जुटे रहे। बैंकों में भारी भीड़ के चलते रकम नहीं मिल सकी।
एटीएम पर भी यही हाल रहा। जैसे-तैसे छोटे नोटों की व्यवस्था कर मेले में पहुंचे। काफी लोग तो मुख्य स्नान वाले दिन ही तिगरी धाम पहुंचे हैं। इसी कारण मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पंद्रह लाख का आंकड़ा पार नहीं कर पाई है। पंद्रह लाख के आसपास ही रही है।
पांच सौ का छुट्टा न मिलने से परेेशान रहे लोग
अमरोहा। तिगरी मेले में आए दुकानदारों से जब बात की गई तो उनका दर्द छलक उठा, बोले जिंदगी में पहली बार सबसे कम तिगरी मेले में खरीदारी हुई है। खर्चा भी नहीं निकला है। घर गृहस्थी के सामान की दुकान से लेकर बच्चों के खेल खिलौने की खरीदारी बहुत कम हुई। यहां तक की लोगों ने मिठाइयां, चाट पकौड़ी का स्वाद चखने से भी परहेज किया। सर्कस, झोले, मौत का कुआं, सभी पर बड़े नोट बंद होने का असर देखा गया है।
दुकान रमेेेश गोला ने बताया कि अधिकांश मेले में पांच सौ या फिर एक हजार का नोट लेकर आए थे, जब ये नोट प्रतिबंधित हो गए हैं तो हम क्यों लें, पांच सौर हजार का छुट्टा कहां से लाए, इसी कारण भी खरीदारी नहीं हो सकी है। इसी कारण मेले में खरीदारी नहीं हो सकी है। दुकानदारों के चेहरे मुरझाए रहे।