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सौ साल से इस बस्ती में न मय दिखी, न मयकश

Wed, 23 Mar 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
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नौगावां चेयरमैन नदीम अहमद जैदी - फोटो : amar ujala
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अखिलेश शर्मा
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नौगावां सादात/अमरोहा। उत्तर प्रदेश में नौगावां सादात शिया बस्ती किसी मिसाल से कम नहीं है। बस्ती की करीब साठ हजार की आबादी पिछले सौ साल से शराब से दूर है। बस्ती में आज तक न कोई शराब की दुकान है न पीने वाले। यही नहीं कोई सिनेमाघर भी नहीं है। पूरी बस्ती सौ साल पहले लागू हुए एक बॉयलाज पर कायम है। 

नौगावां सादात बस्ती के इतिहास के कुछ दस्तावेज बताते हैं कि 1917 में पूर्व चेयरमैन हाजी अलमदार अली के प्रयास से एक बॉयलाज तैयार किया गया था। इसमें सबसे पहले बस्ती को शराब से दूर रखने का जिक्र है। बस्ती के उस वक्त के खास लोगों में हाजी अंसार हुसैन ने भी इस बॉयलाज का समर्थन किया।
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उस वक्त जो बातें तय हुईं और बॉयलाज में दर्ज की गईं उनमें सबसे ऊपर शराब की बुराई दूर करने की थी। करीब सौ साल पूरे होने के बाद अब नौगावां सादात की आबादी 60 हजार के आसपास पहुंच चुकी है। बस्ती के लोगों में भले ही किसी बात पर मतभेद हो जाएं लेकिन सौ साल पुराना बॉयलाज जैसे का तैसा लागू है।

अभी तक बस्ती में सरकार कोई शराब की दुकान भी नहीं खोल सकी है। बस्ती के लोग शराब से दूर भी हैं। यदि कोई शराब पीएगा तो उसको बस्ती से अलग कर दिया जाएगा। इसी बॉयलाज में सिनेमाघर न खोलने जाने का भी जिक्र है। इसीलिए सौ साल में इतनी बड़ी बस्ती में कोई सिनेमाघर भी नहीं खुला है। 

इतिहास में दर्ज
नौगावां सादात नगर पंचायत के चेयरमैन नदीब अब्बास जैदी का कहना है कि, नौगावां सादात बस्ती का जिक्र इतिहास में दर्ज है। यहां का गौरवशाली इतिहास रहा है। जंगे आजादी में भी लोग शहीद हुए हैं। इस बॉयलाज को लागू करके सौ साल तक कायम रखा जाते रहना भी एक मिसाल है। लोग बॉयलाज पर कायम हैं। इससे साफ झलकता है कि बस्ती में रहने वालों के खून में कुछ तो खासबात है। 

बॉयलाज में यह भी नियम शामिल
नौगावां सादात बस्ती में कोई कालगर्ल नहीं रह सकती। कोई भी ऊंट या हाथी की सवारी बिना अनुमति के नहीं कर सकता। कोई भी पुरुष घर की छत पर चढ़ेगा तो तीन बार आवाज देकर ही छत पर कदम रखेगा। सिनेमाघर नहीं खोला जाएगा। 

नगर पंचायत और थाने में दर्ज है बॉयलाज
नौगावां सादात का बॉयलाज नगर पंचायत कार्यालय और थाने में दर्ज है। कोई भी नियम तोड़ने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। लेकिन अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। पूरी बस्ती इस बॉयलाज पर कायम है। 

क्यों बना यह नियम
नौगावां सादात बस्ती में 80 फीसदी परिवार शिया समुदाय से हैं। बाकी में और लोग हैं। 1917 में हाजी अलमदार अली जोकि तहसीलदार थे ने इस बॉयलाज को तैयार कराने में मुख्य भूमिका अदा की थी। हाजी अलमदार अली 1933 से 38 तक नौगावां नगर पंचायत के चेयरमैन भी रहे। इससे पूर्व 1932 -33 में चेयरमैन रहे हाजी अंसार हुसैन ने भी इस बॉयलाज को तैयार कराने में कोशिश की थी। नियम बनाने के पीछे सीधा मकसद था कि बस्ती की अच्छाइयों दूर दूर तक जाएं और लोग अमल करें। 
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बदले जमाने में परंपरा कायम
जमाना भले ही बदल गया हो, शादी ब्याह में शराब परोसी जाने लगी हो। लोग शराब के आदी हो गए हों, लेकिन नौगावां सादात बस्ती पर इस बदले जमाने का कोई असर नहीं पड़ा है, कुछ लोग इस दुर्व्यसन से जुड़ भी गए होंगे तो बस्ती से दूर रहने लगे हैं या बस्ती छोड़कर चले गए हैं। हालांकि बस्ती के आसपास के गांवों में शराब की दुकानें खुली हैं। लेकिन बस्ती के लोगों को उसके आसपास नहीं देखा जाता।
 
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