हसनपुर। जम्मू में बस हादसे की खबर जैसे ही रुखालू गांव पहुंची पूरा गांव सदमे में डूब गया। गांव में चारों तरफ उदासी और खामोशी छाई हुई है। जिस घर से इकबाल गया था वहां के लोग सदमे में हैं और उनकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। इकबाल के परिवार वाले और दोस्त इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि हंसता-खेलता इकबाल अब कभी वापस नहीं आएगा।
इकबाल के घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी हुई है जो इस दुख की घड़ी में परिवार को सांत्वना देने पहुंचे हैं। वहीं, गांव के कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला है। हर कोई अपने जानने वालों का हाल जानने के लिए बेचैन है, जो इस हादसे में घायल हुए हैं। हादसे की खबर मिलते ही कुछ लोग तुरंत जम्मू के लिए रवाना हो गए है, ताकि वे अपने घायलों की मदद कर सकें और उनका हाल जान सकें। पूरे गांव में प्रार्थनाओं का दौर जारी है। गांव के लोग ईश्वर से घायलों के जल्द ठीक होने और मृतकों की आत्मा को शांति मिलने की कामना कर रहे हैं।
मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
रूखालू। इकबाल सिंह की गांव में पकौड़ी की दुकान है। इस तीर्थ यात्रा में उनके साथ परिवार का कोई अन्य सदस्य नहीं था। परिजनों के मुताबिक वह अपने भांजे राहुल को साथ लेकर गए थे। हादसे में राहुल भी घायल है। इकबाल सिंह ने अपने पीछे पत्नी गीता के अलावा दो मासूम बेटी व एक बेटे को छोड़ा है। इकबाल की मौत से तीन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है।
ये श्रद्धालु हुए हादसे में घायल
-फूल कुमार, ओम कली, राम सिंह, बाला देवी, काजल, राकेश कुमार, पुष्पा, ओमपाल, मानसी, नामबीर, जयपाल, शोभाराम, रीना, सूरज, मोकेश, आरती, रामबती, रिंकू, उदल सिंह, निर्मल, अशोक, कौशल, दुष्यंत सिंह, जितेंद्र, छाया, त्रिवेणी, निखल, यशपाल, सुरिंदर सिंह, जतिंदर, राजू, शारदा घायल हो गए। जिनका जम्मू के स्थानीय अस्पताल में उपचार चल रहा है, जबकि प्राथमिक उपचार के बाद पुष्पेंद्र, भगवान सिंह, खूबचंद, गजराज, बिजेंद्र, पूनम, राजेंद्र (बस चालक) को एआईएमएस विजयपुर रेफर किया गया है।