गजरौला। हसनपुर व धनौरा रेंज में एक भी सारस पक्षी नहीं है। वन विभाग ने उनकी गिनती करने के लिए दोनों रेंज में दो दिन कर्मचारी लगाए। वह गंगा किनारे, झील और तालाबों के किनारे गए, पर कोई सारस दिखाई नहीं दिया। राजकीय पक्षी नहीं होने की रिपोर्ट आला अफसरों को मुहैया करा दी।
जिले के हसनपुर व धनौरा वन क्षेत्र का दायरा काफी विस्तृत है। हसनपुर वन क्षेत्र रजबपुर के निकट तक लगता है, दूसरी तरफ कांकांठेर से लेकर गवां के निकट तक गांव हसनपुर वन क्षेत्र में आते हैं। इसी तरह धनौरा वन क्षेत्र बिजनौर जिले की सीमा से लेकर दिल्ली-लखनऊ रेलवे लाइन के किनारे गंगा तक आता है। रजबपुर थाना क्षेत्र के कई गांव भी इसी रेंज में आते हैं। गंगा का सारा क्षेत्र दोनों ही रेंज में पड़ता है। दोनों में कई बड़े तालाब आते हैं, वहीं कालीढाप झील धनौरा रेंज में पड़ती है।
तराई के क्षेत्रों में सारस अधिक पाए जाते हैं। वन विभाग ने राजकीय पक्षी की गिनती कराने के लिए 15 और 16 दिसंबर को बीटवार कर्मचारी लगाए। दो दिन तक कर्मचारी तालाबों, झील, गंगा किनारे यह तलाश करते रहे कि कहीं पर कोई सारस पक्षी तो नहीं है। मगर दोनों ही रेंज में एक भी सारस नहीं मिली। हसनपुर रेंजर नरेश कुमार व धनौरा रेंज के वन दरोगा संतोष चौधरी ने बताया कि उनकी रेंज में कोई सारस नहीं पाया गया।