गजरौला। रक्षाबंधन पर भाइयों के घर पहुंचने में बहनों को गंगा में आई बाढ़ की आफत का सामना करना पड़ा। चकनवाला के सामने ट्रैक्टर-ट्रॉली से बाढ़ के पानी को पार किया। दारानगर, टीकों वाली, मंदिर वाली और भुड्डी वाली गांव की बहनों को नाव का सहारा लेना पड़ा। जिसके इंतजार में दोपहर हो गई। मगर भाइयों के घर जाने की खुशी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी।
टापू में बसे उपरोक्त गांवों के ग्रामीणों के लिए बाढ़ का सीजन आफत लेकर आता है। शनिवार को रक्षाबंधन पर इन गांवों में अपने भाइयों के घर राखी बांधने जा रहीं बहनें पहले तट बांध तक पहुंचीं। दारानगर की बहनों ने अलीनगर सामने अपनी बाइक आदि खड़ी कराईं। इसके बाद पानी भरे मार्ग से दो किमी पैदल चलकर बाह नाला तक पहुंचीं। यहां से नाव में बैठकर बाह नाला पार किया।
दूसरे किनारे पर उतर कर फिर दो किमी पैदल चलकर भाइयों के घर जा सकीं। इसी तरह उन बहनों को भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिनकी शादी दारानगर में की गई है। वह भी इसी तरह दुश्वारियों को झेलकर गंगा तट बांध तक आईं। वहीं शीशों वाली, टीकों वाली, जाटों वाली, ढाकों वाली, भुड्डी वाली आदि गांवों की बहनों के सामने मुसीबतों का पहाड़ आया। पहले उन्होंने नाव से बाह नाला पार किया। शीशों वाली तक किसी तरह पहुंचकर ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार हुईं। चार किमी का पानी का सफर तय किया। इस तरह आने जाने में दोपहर हो गई।