अमरोहा। छह मोहर्रम का जुलूस मोहल्ला काली पगड़ी स्थित अजाखाना मुसम्मात नूरन से बरामद हुआ। जुलूस में दाराब जैदी ने मरसिया पढ़ा बृहस्पतिवार को शाहे बेकस की आखरी सवारी है। गमगीन माहौल में जुलूस निकला। हुसैन, हुसैन की सदाएं बुलंद हुईं। जुलूस में अजादाराने हुसैन नंगे पैर, नंगे सिर नौहा पढ़ते हुए सफों में चल रहे थे।
जुलूस में शामिल लोग अलग-अलग अजाखानों, घरों में की गई नियाज नजर में शामिल होते हैं। बुधवार के जुलूस की विशेषता यह है कि इसमें बाजा बहुत अलग होता है। इसमें लगभग 22 बैंड होते हैं। छह मोहर्रम के जुलूस में शामिल होने वाले अजादारान की तादाद बढ़ जाती है। दुलदुल व तख्त पर छतरी चलती है।
जुलूस अपने निर्धारित मार्ग मच्छरट्टा, मंडी चैब, दरबारे कलां, कटकुई, काली पगड़ी आदि मोहल्लों से होते हुए नूरन के अजाखाने पर आकर समाप्त हुआ। दुलदुल के पीछे अजादार इमाम हुसैन शहीदे कर्बला हुसैन, मेहमाने कर्बला हुसैन, राकिबे दोशे मुस्तफा हुसैन, हुसैन... के नारे लगाते हुऐ चल रहे थे। जुलूस इमाम हुसैन के इस संदेश को प्रचारित व प्रसारित करते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ जंग करो।
इमाम हुसैन ने कर्बला में अपनी जान कुर्बान कर दी लेकिन अपने नाना हजरत मोहम्मद सलल. के दीन इस्लाम को बचा लिया। अंजुमने रजाकाराने हुसैनी की एक एंबुलेंस जुलूस के साथ चल रही थी। इसमें सीएमओ द्वारा नियुक्त चिकित्सक दवाई देते हुए चल रहे थे। जुलूस का संचालन अंजुमन रजाकाराने हुसैनी ने किया। इस दौरान रजाकारान काईद गुलाम सज्जाद, इमदाद आब्दी, जनरल सेक्रेटरी खुर्शीद हैदर जैदी, मो. तकी, डॉ. चंदन नकवी, वसीम जैदी के साथ डीएम से नामित कमेटी के सदस्य लियाकत अली मौजूद रहे।