हसनपुर। पौरारा गांव में सोमवार सुबह जिसने भी छत का मंजर देखा, उसकी रूह कांप गई। जावित्री के शव की हालत बयां कर रही थी कि कातिलों ने कितनी बेरहमी दिखाई। चिल्लाने की आवाज बाहर न जा सके, इसलिए मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया था।
विरोध न कर सके, इसलिए उसके ही दुपट्टे से हाथ और पैर बांध दिए गए थे। जावित्री के सिर और शरीर पर चोटों के कई गंभीर निशान मिले हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि मौत से पहले उसने बचने के लिए कितना संघर्ष किया होगा।
मासूम प्रशांत के सिर से उठा मां का साया : जिस तीन साल के मासूम प्रशांत को जावित्री ने अपने बुढ़ापे का सहारा बनाने के लिए गोद लिया था, उसे क्या पता था कि सोमवार की सुबह उसके जीवन का सबसे बड़ा अंधेरा लेकर आएगी। रोज़ की तरह जावित्री छत पर चारपाई पर अपने कलेजे के टुकड़े को साथ लेकर सोई थी। कातिलों ने जब जावित्री के मुंह में कपड़ा ठूंसा और हाथ-पैर बांधे, तब वह मासूम शायद गहरी नींद में था। मां की ममता के साए में सो रहे बच्चे को इस बात का अहसास भी नहीं था कि उसके बगल में ही उसकी मां की सांसें थम चुकी हैं। संवाद