कस्बे में छह मोहर्रम का मातमी जुलूस अंजुमने हैदरी के तत्वावधान में इमामबाड़ा पुख्ता बंगला से बरामद किया गया। बुधवार दोपहर सबसे पहले मजलूम-ए-कर्बला इमाम हुसैन का मर्सिया पढ़ा गया। मौलाना मोहम्मद अब्बास ने मैदाने कर्बला के बारे में बताया।
इमाम हुसैन के दोस्त हबीब इब्ने मजाहिर के कर्बला पहुंचने की मंजरकशी पेश की गई। इसके बाद आगे बढ़े जुलूस में सबसे आगे अजादार ढोल-ताशे बजा रहे थे। इसके पीछे अलम, हबीब इब्ने मजाहिर व औन-ओ-मोहम्मद के शबीहे ताबूत शामिल थे। सबसे पीछे जुलजनाह थे। जिनके पीछे कामिल ने अंजुमन का परचम बुलंद कर रखा था। रास्ते में कई स्थानों पर अजादारोंं ने मशहूर नौहे पढ़कर माहौल को गमगीन कर दिया। सीनाजनी करते हुए अजादारों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम बरपा किया। तयशुदा रास्तों से होता हुआ जुलूस देर शाम इमामबाड़ा पुख्ता बंगला पहुंचकर संपन्न हुआ। संचालन अंजुमन अध्यक्ष मोहम्मद अब्बास, सिब्ते हैदर, हुसैन अब्बास, तारिक रजा शोबी, हसन मुजतबा आदि ने किया।