कर्बला के शहीदों की याद में पांच मोहर्रम का मातमी जुलूस मोहल्ला सद्दो स्थित इमामबाड़ा रफाती से बरामद हुआ। अजादारों ने खामोश रहकर हजरत इमाम हुसैन अल. की शहादत का गम मनाया।
मंगलवार को जुलूस की शुरुआत परंपरागत तरीके से सुबह नौ बजे हुई। जुलूस में सबसे आगे ऊंटों का काफिला था, जिस पर मासूम बच्चे सवार थे। यह काफिला कर्बला के उस वक्त की याद दिला रहा था जब इमाम हुसैन की शहादत के बाद बाकी बचे परिवार के लोग और बच्चे ऊंटों पर सवार होकर कर्बला से शाम के सफर पर निकले थे। इसके पीछे रौशन चौकी और आराईश चल रही थी। हुसैनी बाजा बज रहा था।
अजादाराने हुसैन शबीहे ताबूत और दुलदुल के साथ खामोश चल रहे थे। जुलूस शहर में करीब 17 किलोमीटर की गश्त के दौरान 72 इमामबाड़ों से गुजरते हुए देर शाम इमामबाड़ा रफाती पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में शामिल अजादारों के लिए कई स्थानों पर चाय व पानी का इंतजाम भी किया गया। वहीं, शहर के ज्यादातर इमामबाड़ों में देर रात तक मजलिसों का सिलसिला जारी रहा।
धर्मगुरुओं ने शहादत-ए-हुसैन का वाक्या सुनाकर लोगों को शोहादा-ए-कर्बला के बताए रास्ते पर चलने का दर्स दिया। डाॅ.नाशिर नकवी, डाॅ.लाडले रहबर, मुजाहिद अब्बास, मोहम्मद तुराब, अंजुम अब्बास, हुसैन रजा आदि ने मर्सिये पेश किए। डीएम द्वारा नामित कमेटी में शामिल लियाकत अली, जिया एजाज, बाकर रजा नकवी, नदीम नकवी, शहजाद रजा व कासिम आब्दी की निगरानी में जुलूस बरामद हुआ। संचालन अंजुमन रजाकारान-ए-हुसैनी ने किया। इस दौरान काईद गुलाम सज्जाद, इमदाद आब्दी, खुर्शीद हैदर जैदी, नजीर हैदर, सलीम जैदी, काशिफ जैदी मौजूद रहे।