अमरोहा। शायरी की बात हो और अमरोहा जिक्र न हो ऐसा संभव नहीं है। यहां की शायरी की गूंज देश ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार तक विदेशों में भी सुनाई देती रही है। अदबी दुनिया की बड़ी शख्सियत नूर अमरोहवी ने यहां की शायरी को विदेशों में भी रूबरू कराया है। वह कई इंटरनेशनल मुशायरों का आयोजन भी कर चुके हैं।
अमरोही की सरजमीं पर एक से बढ़कर एक शायरों ने जन्म लिया, जिन्होंने अपनी शायरी के दम पर इस शहर की पहचान के एक अदबी शहर के रूप में कराई है। देश के साथ ही विदेशों की धरती पर यहां के शायरों ने खूब वाहवाही लूटी है।
ऐसा ही एक नाम नूर अमरोहवी का भी है। फिलहाल अमेरिका के टेक्सास शहर में रहकर भी शायरी के शौक को जिंदा रखे हुए हैं। नूर अमरोहवी का जन्म 22 जून 1972 को शफातपोता में हुआ। लेकिन परिवार समेत करीब 24 साल पहले वह परिवार समेत टेक्सास में जाकर बस गए। वहां जाने के बाद भी शायरी के शौक को बरकरार रखा।
शायरी में उनकी दो किताबों का प्रकाशन भी हो चुका है। शहर के वरिष्ठ साहित्यकार मिस्बाह अहमद सिद्दीकी बताते हैं कि नूर अमरोहवी ने बड़ी सादगी के साथ ही जज्बात को अपनी शायरी में जगह दी है। अमेरिका में रहते हुए वह पानी के जहाज ओर स्काईपे पर इंटरनेशनल मुशायरों का आयोजन करा चुके हैं। उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने भी फख्र-ए-हिंद के सम्मान से नवाजा था। मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली के साथ साथ दुबई में भी नूर अमरोहवी के नाम से जश्न-ए- नूर का आयोजन हो चुका है, जिसमें नामचीन शायरों ने अपने कलाम पढ़े थे।