अमरोहा। किसान की पत्नी की मौत के बाद बीमा कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया। कंपनी अफसरों ने भी सुनवाई नहीं की। अब न्यायालय स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को क्लेम के 50 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए हैं। कंपनी को शारीरिक-मानसिक पीड़ा व वाद व्यय के खर्च के रूप में एक लाख रुपये भी देने होंगे। बीमा कंपनी को यह रकम दो माह में देनी होगी।
गजरौला क्षेत्र के फौंदापुर गांव निवासी किसान श्योराज सिंह ने पत्नी अंजू चौहान के नाम पर जीवन बीमा के तहत 50 लाख की पॉलिसी ली थी जिसमें श्योराज सिंह नॉमिनी थे। यह पॉलिसी बीमा कंपनी द्वारा 28 फरवरी 2022 को जारी की गई थी। इसका प्रीमियम नियमानुसार अंजू के खाते से जमा होता था। अप्रैल 2022 को अंजू अचानक बीमार हो गईं और उनका इलाज मेरठ के एक मल्टी स्पेशलिस्ट ट्रामा सेंटर में हुआ लेकिन उनकी मौत हो गई।
इसके बाद श्योराज ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया और कंपनी द्वारा मांगे गए दस्तावेज उसकी वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कंपनी ने 26 जुलाई 2021 को आरटीजीएस के माध्यम से 4763 रुपये 25 पैसे श्योराज के खाते में ट्रांसफर कर दिए। श्योराज ने बाकी 49.95 लाख रुपये के लिए संपर्क किया तो बीमा कंपनी ने भुगतान करने से मना कर दिया।
दो माह में चुकानी होगी रकम
इस पर श्योराज सिंह ने स्थायी लोक अदालत की शरण ली। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष ओमवीर सिंह, सदस्य मोहम्मद मतीन और सिराज अहमद ने बीमा कंपनी के अफसरों को तलब कर लिया। कोर्ट ने बीमा कंपनी की ओर से रखे गए तर्कों को बलहीन माना। कोर्ट ने कंपनी को क्लेम की रकम 49,55,236 रुपये को याचिका दायर करने की तिथि से भुगतान करने तक नौ प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने के निर्देश दिए हैं। शारीरिक-मानसिक आर्थिक पीड़ा के लिए 75 हजार और वाद में खर्च के रूप में 25 हजार रुपये भी बीमा कंपनी को अदा करने होंगे। बीमा कंपनी को यह रकम दो माह में देनी होगी।