फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amroha News: आईडी निष्क्रिय थी, फिर भी जारी हो गए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र

विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने वाली आईडी निष्क्रिय थी, फिर भी छह और सात अक्तूबर को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी हो गए। तोफापुर ग्राम पंचायत में सामने आए इस मामले ने ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था और उसकी निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर आईडी बंद होने के बावजूद प्रमाणपत्र कैसे बने? सिस्टम में सेंध लगी तो इसकी जानकारी समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं हुई? पंचायत सचिव की शिकायत के बाद अब मामले की जांच लखनऊ पुलिस मुख्यालय स्तर से कराने की तैयारी है।
विज्ञापन

तोफापुर ग्राम पंचायत में तोफापुर के अलावा इब्राहिमपुर उर्फ भवानीपुर गांव भी शामिल है। दोनों गांवों की आबादी करीब ढाई हजार है। पंचायत सचिव अमरजीत सिंह के मुताबिक, पिछले साल जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने अब तक करीब 25 जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए थे। उनके स्तर से आखिरी प्रमाणपत्र 29 सितंबर को जारी किया गया था। इसके बाद उन्होंने कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं किया।
सचिव के अनुसार, आईडी सक्रिय नहीं होने पर उन्होंने सीएमओ कार्यालय में शिकायत की थी। इसके बाद 12 सितंबर को आईडी सक्रिय हुई। उनका दावा है कि छह और सात अक्तूबर को आईडी निष्क्रिय थी, लेकिन इन्हीं तारीखों में फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए गए। ऐसे में आईडी की सुरक्षा, प्रमाणपत्र जारी करने की तकनीकी प्रक्रिया और ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि आईडी निष्क्रिय थी तो प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति किस स्तर से मिली और सिस्टम में दर्ज गतिविधियों की निगरानी क्यों नहीं हो सकी। सचिव अमरजीत सिंह ने डिडौली कोतवाली में तहरीर दी है।
विज्ञापन


दो मोबाइल नंबरों पर आए ओटीपी, 80 साल के लोगों के भी बने प्रमाणपत्र

अमरोहा। जन्म प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े की जांच में सामने आया है कि वर्ष 1939, 1940, 1945 और 1950 में जन्मे लोगों के प्रमाणपत्र भी जारी किए गए। सभी प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया में केवल दो मोबाइल नंबरों पर ओटीपी भेजे गए। पुलिस इन नंबरों की जांच कर रही है। जारी प्रमाणपत्रों में दिल्ली के चार, राजस्थान के दो, पश्चिम बंगाल के 15, बिहार के 72, सिक्किम के एक, झारखंड के 53, हिमाचल प्रदेश के छह, मध्य प्रदेश के नौ, हरियाणा के 17, कर्नाटक के 15, महाराष्ट्र के 13, पंजाब के सात, उत्तराखंड के दो, असम के आठ, तेलंगाना के तीन और आंध्र प्रदेश के एक व्यक्ति के प्रमाणपत्र शामिल हैं। छह प्रमाणपत्रों में राज्य का नाम स्पष्ट नहीं है। संवाद
-
तोफापुर की आईडी से बने 498 जन्म प्रमाणपत्र निरस्त करने की तैयारी




अमरोहा। जोया ब्लॉक की तोफापुर ग्राम पंचायत के पंचायत सचिव की आईडी हैक कर बनाए गए 498 जन्म प्रमाणपत्रों को निरस्त करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) नितिन कुमार ने सभी प्रमाणपत्रों की सूची के साथ जिला सूचना विज्ञान अधिकारी को पत्र भेजा है। इसमें पोर्टल से संबंधित नाम हटाकर प्रमाणपत्र निरस्त करने के लिए कहा गया है। डीपीआरओ के मुताबिक, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है। पोर्टल से नाम हटने के बाद इन प्रमाणपत्रों की वैधता समाप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पोर्टल पर सत्यापन की व्यवस्था होने के कारण इन प्रमाणपत्रों का देश में कहीं भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। संवाद


2022 में भी सामने आया था मामला

अमरोहा में वर्ष 2022 में भी फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी होने का मामला सामने आया था। तब जालसाजों ने जोया ब्लॉक की ग्राम पंचायत शेखुपुरा माफी के पंचायत सचिव और रहरा सीएचसी की आईडी हैक कर प्रमाणपत्र जारी किए थे। अब दोबारा बड़ी संख्या में संदिग्ध प्रमाणपत्र मिलने से विभागीय निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रकरण की जांच लखनऊ पुलिस मुख्यालय स्तर से कराई जाएगी। प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना लखनऊ भेजने या शिकायती पत्र मुख्यालय भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आईडी का दुरुपयोग कैसे हुआ, प्रमाणपत्र किसने जारी किए और निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई।
- लखन सिंह यादव, एसपी
-
यूपी के कई जिलों के लोगों के बनाए जन्म प्रमाणपत्र

ग्राम पंचायत सचिव के मुताबिक, जालसाजों ने ग्राम पंचायत तौफापुर से उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लोगों के जन्म प्रमाणपत्र जारी किए हैं। इनमें चित्रकूट, सिद्धार्थनगर, चंदौली, फर्रुखाबाद, कानपुर, बलिया, प्रतापगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, शाहजहांपुर और जौनपुर समेत अन्य जिले शामिल हैं।

इन लोगों के बनाए गए जन्म प्रमाणपत्र
ग्राम पंचायत तोफापुर से जारी जन्म प्रमाणपत्रों में गुड़िया रावत, नेहा कुमारी, अंशिका, प्रिया कुमारी, छीकेते हेंब्रम, सुगन कुंवर, प्रीति कुमारी, पल्लवी यादव, अनन्या कुशवाह, लक्ष्मी देवी, जलीय देवी, शंकर सिंह और रामदेई के नाम सामने आए हैं। ग्राम पंचायत सचिव के मुताबिक, इन नामों से जन्म प्रमाणपत्र बनाए गए हैं। मामले में सामने आए नामों और प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि प्रमाणपत्र किन अभिलेखों के आधार पर जारी किए गए और इनमें दर्ज जानकारियां वास्तविक हैं या नहीं।

डॉक्टर की आईडी हैक कर फर्जी मेडिकल से जारी कर दिए थे ड्राइविंग लाइसेंस
अमरोहा। करीब एक साल पहले भी एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए जिले के एक चिकित्सक की आईडी हैक कर फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र अपलोड किए जा रहे थे। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर एआरटीओ कार्यालय से ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिए गए थे। जबकि चिकित्सक ने किसी भी आवेदक का मेडिकल परीक्षण कर प्रमाणपत्र अपलोड नहीं किया था। इसके बावजूद उनकी आईडी से अज्ञात लोग फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र अपलोड कर रहे थे। इन्हीं के आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा रहे थे। मेडिकल प्रमाणपत्र अपलोड करते समय उनके मोबाइल नंबर पर ओटीपी आना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। उन्हें आशंका थी कि आईडी हैक करने के साथ उसमें दर्ज मोबाइल नंबर भी बदल दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें