अमरोहा। आम के पेड़ों पर आए बाैर ने बागवानों के चेहरों पर खुशी ला दी है। बाैर पर अगर बारिश की बाैछार और आंधी का वार नहीं हुआ तो इस बार आम की पैदावार भरपूर होगी। अमरोहा के दशहरी, लंगड़ा चाैसा से दुबई का बाजार महकेगा। आम टूटने से ढाई महीने पहले की दुबई से 250 टन आम के ऑर्डर मिले गए हैं। जून के पहले सप्ताह में इसकी सप्लाई होगी।
उद्यान विभाग के मुताबिक मुरादाबाद मंडल में 27355 हेक्टेयर भूमि पर आम की फसल होती है। सबसे ज्यादा करीब 38 फीसदी हिस्सेदारी अमरोहा की है। यहां 10250 हेक्टेयर भूमि पर आम की फसल होती है। मंडल में हर साल आम का उत्पादन बढ़ रहा है। मार्च के दूसरे हफ्ते में आम के बाग बाैर की खुशबू से महक उठे हैं। हर पत्ते के बीच बड़े पैमाने पर बाैर निकल आए हैं। जिसे देख बागवानों के चेहरे खिल गए हैं। विभाग के मुताबिक अभी तक कहीं से बाैर में किसी तरह के रोग की सूचना नहीं मिली है। बाैर के हिसाब से माैसम अनुकूल है। आंधी और बारिश से फसल प्रभावित नहीं हुई तो पिछले साल से आम का उत्पादन अधिक होने का अनुमान है।
00
जंग से ट्रांसपोर्ट हो सकता है महंगा
यूपी मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी के मुताबिक अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के कारण ट्रांसपोर्ट पर असर पड़ सकता है, क्योंकि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। हालांकि अमरोहा का आम तीनों ही देश में नहीं जाता है। इसके बावजूद अमरोहा के आम की मांग लगातार बढ़ रही है, जो यहां के बागवानों के लिए अच्छी बात है। अमरोहा जिले में करीब 60 प्रजातियों के आम पाए जाते हैं, जिनका स्वाद और मिठास देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों को आकर्षित करता है।
-
- इस बार सबसे पहले अमरोहा का दशहरी, लंगड़ा आम दुबई भेजा जाएगा। यहां से अमरोहा के आम की भारी मांग है। दो महीने के सीजन में इस बार दुबई से आम की मांग अधिक आई है और वहां से 250 टन आम के निर्यात का ऑर्डर मिला है। जल्दी ही मलेशिया और सऊदी अरब से भी ऑर्डर मिलने की संभावना है। - नदीम सिद्दीकी, अध्यक्ष, यूपी मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन
00
इन देशों के लोग चख चुके अमरोहा के आम स्वाद
अमरोहा से सऊदी अरब, कुवैत, दुबई, बहरीन, शारजाह, ओमान, सिंगापुर, मलेशिया, अबुधाबी, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, उजबेकिस्तान, इटली, स्पेन, जर्मनी व लंदन तक आम निर्यात किया जाता रहा है। यहां के लोग अमरोहा के आम का स्वाद चख चुके हैं।
-
नियादर मनौटा को भी मिली विदेश में पहचान
अमरोहा में तैयार हुई आम की प्रजाति नियादर मनौटा भी देश-विदेश के लोगों को बेहद पसंद आती है। हसनपुर तहसील के गांव मनौटा में इस प्रजाति को तैयार किया गया था। इसके अलावा दशहरी, चौसा, लंगड़ा, बंबई, फजरी, समर बहिश्त, सुरखा, हुसन आरा, खट्टा व तोतापरी आम भी यहां की पैदावार में शामिल हैं।
महाराष्ट्र के अल्फांसो, गुजरात के केसर व नीलम को भी दी मात
जानकारों की मानें तो अमरोहा का वातावरण और मिट्टी आम की पैदावार के लिए बेहद मुफीद है। यहां पैदा होने वाले आम की कुछ किस्में ऐसी भी हैं, जो दुनिया भर में मशहूर हैं। जिसमें सबसे ज्यादा दशहरी, चौसा और लंगड़ा आम पसंद किया जाता है। विदेश से सबसे ज्यादा मांग इन्हीं तीन वैरायटी के आम की रहती है। अमरोहा के आमों की मिठास ने तो निर्यात के मामले में महाराष्ट्र का अल्फांसो और गुजरात का केसर व नीलम तथा आंध्र प्रदेश के बैगनपल्ली को भी मात दी है।
आम के बौर पर मंडराया मधुआ कीट का खतरा
अमरोहा के जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि बदलते मौसम के कारण फसल पर कीट और रोगों का खतरा भी बढ़ गया है। खासकर मधुआ कीट को आम की फसल के लिए सबसे विनाशकारी माना जाता है, जो फरवरी-मार्च में फूल आने के समय तेजी से फैलता है। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो यह 60 से 80 प्रतिशत तक पुष्प झड़ाव कर भारी उत्पादन हानि का कारण बन सकता है।
- अभी तक आम की फसल के लिए माैसम अनुकूल है। पेड़ों पर बाैर ज्यादा आए हैं। मंडल के किसी जिले से बाैर पर किसी तरह के रोग होने की शिकायत नहीं मिली है। अगर स्थिति यही रही तो पिछले साल की तुलना में आम की पैदावार अधिक होगी। - विनीत कुमार, उप निदेशक उद्यान
000
मंडल में किस जिले में कितने हेक्टेयर में आम की फसल
जिले हेक्टेयर
अमरोहा 10520
रामपुर 2495
मुरादाबाद 3190
संभल 1570
बिजनाैर 9580
-
पिछले पांच साल में आम की पैदावार की स्थिति
वर्षआम उत्पादन
2021-22-1,97,470
2022-23- 2,10,909
2023-24-1,74,726
2024-25-2,05,560
2025-26-4,86,121
नोट: आम उत्पादन के आंकड़े मीट्रिक टन में हैं।
00
मुरादाबाद में बंबइया और आम्रपाली भी
मुरादाबाद। मुरादाबाद जिले में करीब 3190 हेक्टेयर में ठाकुरद्वारा, बिलारी, कुंदरकी, छजलैट और कांठ इलाके में आम की फसल होती है। यहां दशहरी के अलावा लंगड़ा, चाैसा, बंबइया और आम्रपाली की किस्में होती हैं। इसके अलावा रामपुर और बिजनाैर जिले के कुछ इलाकों में आम के बाग हैं।