कोर्ट ने माना कि डीएम की बनाई जांच समिति ने निष्पक्ष जांच नहीं की है। डीएम की आख्या में यह तथ्य सामने आया कि किसान की बहन के दो आधार कार्ड थे, जिनमें अलग-अलग जन्मतिथि अंकित थी। दो आधार की बात थाने की आख्या में नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि दो आधार की बात बाद की जांच आख्या में शामिल की गई है। इसके अलावा यह मान भी लिया जाए कि युवती के दो आधार कार्ड थे और यह जानकारी मौके पर ही जांच करने गए आरोपियों को थी। ऐसी स्थिति में उक्त लोगों को अधिकतम आयु वाले आधार कार्ड को मान्यता देनी चाहिए थी। विधि का यह सिद्धांत है, जहां पर दो जन्म तिथियां संज्ञान में आएं तो अधिकतम आयु वाली जन्मतिथि मान्य होती है।
कोर्ट ने माना शादी समारोह में जांच करने पहुंचे लोगों को दो आधार कार्ड की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद भी दो आधार कार्ड के संबंध में उन्होंने कार्रवाई नहीं की। इस तथ्य का उल्लेख 173 (4) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता को प्रस्तुत करने के पश्चात गठित जांच आख्या में किया है। इससे पहले दो आधार कार्ड के तथ्य की कोई बात सामने नहीं आई है। वहीं, जब युवती को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, उस समय भी दूसरा आधार कार्ड सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। डीएम की आख्या में बालिका के शैक्षणिक स्कूल से संबंधित प्रधानाचार्य को तलब किया, जिन्होंने शैक्षणिक प्रमाणपत्र का सत्यापन किया है। जिसके अनुसार बालिका बालिग है और उसकी उम्र 21 वर्ष है।
युवती की बहन से रंजिश रखता है अशोक
जांच कमेटी ने आरोपी अशोक कुमार का बयान दर्ज किए है। उसके बयानों में सामने आया कि युवती का भाई तीन माह पहले उसकी छोटी बहन को भगा ले गया था। दोनों ने शादी भी कर ली है। बयान के अनुसार युवती के भाई ने करीब छह पहले एक लड़की से बलात्कार किया था, जिसमें वह जेल भी गया था। तभी से अशोक युवती के भाई से रंजिश रखता है। कोर्ट के अनुसार अशोक कुमार किसान की बहन की शादी न होने के लिए झूठी गवाही दे सकता है और जांच समिति द्वारा किसान की जिससे रंजिश है, उसका बयान अंकित करने में आरोपियों को बचाएं जाने की मंशा दिखाई देती है।
बयान में जन्मतिथि का उल्लेख नहीं
इसके बाद प्रोबेशन कार्यालय में तैनात संरक्षण अधिकारी सुरभि और आदिल के बयान से स्पष्ट है कि चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 पर कॉल आई। जिसके बाद वह विवाह स्थल पर पहुंचे। बालिग होने का प्रमाण मांगा तो परिजनों ने आधार कार्ड दिखाया। परिजनों द्वारा कोई शैक्षणिक दस्तावेज जन्मतिथि के संबंध उपलब्ध नहीं कराया। सुरभि व आदिल के बयान से स्पष्ट है कि उन्होंने मौके पर आधार कार्ड देखा था, लेकिन उसमें जन्मतिथि क्या लिखी थी, उसका अपने बयान में उल्लेख नहीं किया। साथ ही जांच समिति ने उस आधार कार्ड में अंकित जन्मतिथि के संबंध में प्रश्न न पूछकर आरोपियों को बचाए जाने की अपनी दुर्भावनापूर्ण मंशा को दिखाया है।
संरक्षण अधिकारी के बयान में भी दो आधार की बात नहीं
जिला प्रोबेशन कार्यालय में कार्यरत ,संरक्षण अधिकारी सुरभि व आदिल के बयान से दो आधार कार्ड की बात नहीं आई है। इस प्रकार दूसरे कूटरचित आधार के संबंध में भी आरोपियों के खिलाफ समुचित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया जाना आवश्यक है। जांच समिति ने जो आख्या दी है, उसमें किसी भी गवाह ने दो आधार कार्ड देने की बात नहीं कही है। लेकिन जांच समिति ने अपने निष्कर्ष में चाइल्ड हेल्पलाइन के शिकायतकर्ता द्वारा दूसरा आधार कार्ड प्रस्तुत किए जाने, जिसमें जन्मतिथि 10 मार्च 2012 अंकित होने का उपलब्ध कराया बताया है। लेकिन, जांच समिति द्वारा चाइल्ड हेल्पलाइन के शिकायतकर्ता का बयान अंकित नहीं किया गया और न ही उसका नाम खोला गया है।
मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी
जांच आख्या व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से स्पष्ट है कि जो दूसरा आधार कार्ड चाइल्ड हेल्पलाइन के शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल किया गया है। वह उसके द्वारा कूटरचित किया गया है और उस साजिश के तहत आरोपी युवती को उसके मंडप से उठा लाए। लिहाजा निष्कर्ष से स्पष्ट है कि आरोपी युवती को उसके शादी के मंडप से उठा लाए, जबकि वह बालिग थी। आरोपियों का उक्त कार्य जघन्य अपराध के साथ युवती के मूल अधिकारों व मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। युवती को उठाए जाने के पीछे धन मांगने की बात भी विश्वसनीय प्रतीत होती है। चूंकि प्रस्तुत मामले में जांच समिति द्वारा भी विधिपूर्ण मंशा से निष्पक्ष जांच नहीं की गई है। क्योंकि, आरोपी सरकारी सेवा में है। ऐसी परिस्थितियों में प्रस्तुत गंभीर व जघन्य मामले की निष्पक्ष जांच कराया जाना जरूरी है।