फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amroha News: विकास के दावे धड़ाम... धरातल पर नहीं उतरे दर्जनों काम

विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा। जिले में विकास कार्यों कराने के अफसरों के दावे धड़ाम है। जिले में दर्जनों काम वर्षों बाद भी धरातल पर ही नहीं उतर सके। गजरौला में बनने वाली क्षेत्रीय कार्यशाला का निर्माण शुरू नहीं हो सका। जबकि कैलसा रेलवे क्रॉसिंग पर बनने वाला टू लेन का ओवरब्रिज का सपना आज तक अधूरा है। योगी आदित्यनाथ की घोषणा के आठ साल बाद भी हसनपुर चीनी मिल की पेराई क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकी।
विज्ञापन

अमरोहा के अफसर भी करीब तीन साल से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे तीन गांवों के किसानों को मनाने नाकामयाब रहे हैं। इसी कारण 4900 करोड़ रुपये की परियोजना अधर में लटकी है। जिले में बैंकों की चौखट पर युवाओं का उद्यमी बनने का सपना दम तोड़ रहा है। आवेदन के सापेक्ष युवाओं को ऋण मुहैया नहीं कराया जा रहा है।

रजबपुर: तीन साल से अधर में लटकी मध्य गंगा नहर परियोजना

जनपद बिजनौर बैराज से मध्य गंगा नहर के निर्माण का कार्य वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। इससे दो शाखाएं चंदौसी व बहजोई निकल रही हैं। इसमें चंदौसी को बैराज से दूरी करीब 126 किलो मीटर और बहजोई को 116.8 किलो मीटर है। वर्ष 2011 में निर्माण कार्य धनराशि के अभाव में बंद हो गया था। उस समय इसका बजट 1060.76 करोड़ था। लेकिन साल 2016 में दूसरे फेज का काम शुरू हुआ। जबकि वर्ष 2023 तक पूरा होना था। शासन ने बजट को बढ़ाकर 4417.21 करोड़ कर दिया। इससे बहजोई शाखा बन गई थी और उसमें पानी भी छोड़ दिया गया है। चंदौसी शाखा का काम अभी लटका है। यह तीन गांव कूबी, रामपुर घना और मोहनपुर में बंद है। यहां के किसान मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना मुआवजा मांग रहे हैं जबकि, प्रशासन उन्हें वर्ष 2011 के हिसाब से मुआवजा दे रहा है। किसान मुख्यमंत्री से भी मिलकर मांग कर चुके हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसान संगठन नेताओं से सहारा ले चुके हैं लेकिन, उनको अभी तक न्याय नहीं मिला। तीनों गांव के किसान वर्ष 27 फरवरी 2023 से अनिश्चितकालीन धरना दे रहे थे। इधर, परियोजना के बजट को भी बढ़ाकर 4900 करोड़ कर दिया गया है। नहर बनने से मंडल के 12 ब्लॉक 1850 गांव के करीब 4.10 लाख किसानों को फायदा मिलेगा। लेकिन, करीब ढाई किलोमीटर लंबी नहर की खोदाई के लिए कई बार किसान व प्रशासन आमने-सामने आए। टकराव की स्थिति बनी तो प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा था। किसान जमीन की चार गुणा मुआवजे की मांग को लेकर किसान और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच शनिवार को भी वार्ता हुई।
विज्ञापन


कैलसा: घोषणा के पांच साल... कैलसा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का कार्य शुरू नहीं
ट्रेनों के आने जाने से कैलसा रेलवे क्रॉसिंग को बंद करना पड़ता है। इस मार्ग से अमरोहा-मुरादाबाद आने जाने के लिए वाहनों का सर्वाधिक दबाव रहता है। कुछ मिनट रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से काफी देर तक जाम लग जाता है। राजनीतिक दलों के अलावा स्थानीय लोगों ने रेल उपरिगामी सेतु बनाने की मांग कर चुके हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अक्तूबर 2020 के विधानसभा उप चुनाव के दौरान पूर्व विधायक संगीता चौहान के समर्थन में रैली के दौरान रेलवे ओवरब्रिज बनाने का ऐलान किया था। इसके बाद नौगांवा सादात की तत्कालीन विधायक संगीता चौहान की पहल पर प्रदेश सरकार ने कैलसा रेलवे क्रॉसिंग पर रेल उपरिगामी सेतु बनाने के लिए सहमति जताई थी। इसके बाद सेतु निगम लिमिटेड की ओर से 60.65 करोड़ का प्रारंभिक बजट भी तैयार कर लिया गया था। तत्कालीन डिप्टी सीएम की घोषणा के पांच साल बाद भी ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। रेल उपरिगामी सेतु की कुल लंबाई 852.50 मीटर रखी गई थी जबकि मुख्य सेतु-रेलवे पोर्शन की लंबाई 70 मीटर तय की गई थी। घोषण के पांच साल बाद भी ओवरब्रिज के निर्माण की कवायद शुरू नहीं हो सकी है। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों समेत बड़ी संख्या में राहगीरों के रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है।


गजरौला: जिले में रोडवेज की क्षेत्रीय कार्यशाला बनने का दावा अभी अधूरा

अमरोहा नगर में डिपो के साथ छोटी कार्यशाला बनी है। इन दिनों डिपो के बेड़े में शामिल बसों की संख्या 88 हैं। कई बार बड़ी खराबी के चलते बसों को मुरादाबाद या अन्य कार्यशालाओं में ठीक कराने के लिए भेजा जाता है। लेकिन, पिछले दिनों अधिकारियों ने दावा किया था कि अमरोहा जिले में ही बसों को दुरुस्त किया जा सकेगा। यह कार्यशाला गजरौला में यूपीएसआईडी (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) की छह बीघा जमीन में बनकर तैयार करने का दावा किया था। शासन से बजट मिलने के बाद जल्द ही कार्यशाला पर कार्य शुरू होने की बात कही थी। विभागीय अफसरों की तरफ से शासन को भेजी गई डीपीआर के फाइनल होने के बाद यहां एक महीने के बाद ही कार्य शुरू कराने का दावा किया था। कार्यशाला बनाने का जिम्मा जल निगम को सौंपा गया है। यूपीएसआईडी की यह जमीन जुबिलेंट के पास स्थित है। जिसे विभाग ने 90 साल की लीज पर लिया गया है। वर्कशॉप दो फ्लोर में बनकर तैयार कराने का दावा किया गया। इसके अलावा कैंटीन, फायर रूम, पार्किंग, टीन शेड आदि बनेंगे।
-
हसनपुर : सीएम की घोषणा के आठ साल बाद भी चीनी मिल का नहीं हुआ विस्तार

करीब 50 साल पहले स्थापित जिले की इकलौती द सहकारी चीनी मिल गजरौला की पेराई क्षमता वृद्धि मुख्यमंत्री की घोषणा के करीब आठ वर्ष बाद भी नहीं हो सकी है। जर्जर हो चुके मिल के पुर्जे हर पेराई सत्र के दौरान गन्ना किसानों को रुलाते हैं। इंडस्ट्री के नाम पर ब्लाक क्षेत्र की एकमात्र पहचान बनी सहकारी चीनी मिल की क्षमता वृद्धि की घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 अप्रैल 2018 को नगर के नुमाइश ग्राउंड पर आयोजित जनसभा में की थी। उम्मीद बंधी कि क्षमता वृद्धि होने से गन्ना पेराई बेहद सुलभ और त्वरित हो जाएगी। कई-कई दिन तक चीनी मिल में गन्ना लेकर खड़े नहीं रहना पड़ेगा। लेकिन, आठ वर्ष बाद भी क्षमता वृद्धि धरातल पर नहीं उतरी है। हां, इस बाबत शासन से पत्राचार का दौर जारी है। वर्तमान में चीनी मिल की गन्ना पेराई क्षमता 2500 टन प्रतिदिन है। जानकारों का कहना है कि 29 अप्रैल वर्ष 1977 से पेराई शुरू होने वाली मिल ने तीन दशक तक पूरी क्षमता के साथ गन्ने की पेराई की थी, लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरता गया चीनी मिल के पुर्जे जर्जर होते गए। इंटीग्रेटेड शुगर कांप्लेक्स बनाने की योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। वर्ष 2024 में शासन ने निर्णय लिया था कि यहां रिफाइंड शुगर के साथ ही एथनॉल भी बनेगा। चीनी मिल बिजली उत्पादन करने के बाद ग्रिड को बेचेगी। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है।

अमरोहा: जिम्मेदार बेखबर, बैंकों की चौखटों पर दम तोड़ रहा रोजगार का सपना

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की स्थापना के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं के तहत 10 से 20 लाख रुपये तक का ऋण दिया जा रहा है लेकिन नए उद्योग लगाने की कोशिश में जुटे युवाओं को बैंकों के ऋण देने में आनाकानी करने से योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। आवेदन के बाद भी महीनों तक फाइलें बैंकों में धूल फांकती रहती हैं। इसके बाद उन्हें अलग-अलग कारण बताते हुए अस्वीकृत कर दिया जा रहा है। बैंक में लोन के लिए आवेदन करने वाले युवाओं की मानें तो कई बार चक्कर लगाने के बाद भी उनका लोन स्वीकृत नहीं किया जाता है। उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार अक्तूबर में जिले को 1800 लक्ष्य के सापेक्ष 3828 आवेदन मिले थे। इनमें से 3301 आवेदन बैंकों में भेजे गए थे जिसमें से केवल 799 युवाओं को लोन मिल सका है।

हसनपुर शुगर मिल की पेराई क्षमता वृद्धि के लिए शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। पत्राचार भी लगातार किया जा रहा है। जैसे निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार कार्य किया जाएगा।- मनोज कुमार डीसीओ
विज्ञापन

-

युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए उद्योग विभाग लगातार काम कर रहा है। इसके लिए किसी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
- अश्वनी कुमार मिश्रा, सीडीओ
-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें