पीपली तगा की पीली कोठी में लगती थी अंग्रेजों की अदालत
अमरोहा/मंडी धनौरा। जिले का पीपली तगा गांव अलग वजह से पहचाना जाता है। अंग्रेजों ने यहां आलीशान कोठी का निर्माण किया था। ब्रिटिश अधिकारी अक्सर यहां आकर रुकते थे। यही नहीं उनकी कोर्ट भी इस कोठी में लगा करती थी। यहां से गुजरने वाले लोगों को रोककर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। इसको लेकर आजादी के मतवालों में प्रतिशोध की ज्वाला भड़की। यही वजह रही कि यह पीली कोठी अंग्रेजों भारत छोड़ाे आंदोलन की गवाह मानी जाती है।
बुजुर्गों की माने तो ब्रिटिश शासन काल में अंग्रेजों की दमनकारी नीति से क्षेत्रीय लोग परेशान थे। 1942 में जब पूरे देश में अंग्रेज भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया गया तो आजादी के मतवालों ने मौका पाकर इस कोठी पर चढ़ाई कर इसे आग के हवाले कर दिया था। साथ ही कोठी में रखे कीमती सामान को लूट लिया था। इस मामले में ब्रिटिश अधिकारियों ने स्थानीय क्रांतिकारियों पर मुकदमे भी दर्ज कराए थे। हालांकि 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद भारत सरकार ने इन सभी मुकदमों को वापस ले लिया था। एक बीघा भूमि में बनी इस ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख वर्तमान में सिंचाई विभाग द्वारा की जा रही है। लेकिन यह धरोहर आज भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
पेली तगा गांव की पहचान इस पीली कोठी से होती आई है। वर्षों से पीली कोठी के जीर्णोद्धार की बात चल रही थी। यह सिंचाई विभाग के अंडर में थी। अब इसे तोड़कर यहां बिजलीघर बनाया जाएगा। हालांकि, इसके कुछ हिस्से को संरक्षित भी रखा जाएगा। ताकि गांव की धरोहर के तौर पर इसे संजो कर रखा जा सके।
-दुष्यंत त्यागी, महिला ग्राम प्रधान, पेली तगा।
जटपुरा के अमृत सिंह, परसादी और हरि सिंह ने लगाई थी आग
धनौरा-नौगांवा मार्ग पर स्थित ग्राम जटपुरा कभी अंग्रेजों की आंख में खटकता था। वजह यहां के युवा अमृत सिंह, परसादी व हरि सिंह अंग्रेजों की दमनकारी नीति का विरोध करते थे। पीली कोठी में मुरादाबाद से अंग्रेज जज यहां आकर स्थानीय मुकदमों में फैसला सुनाते थे। जो लोगों पर जुल्म करते थे। जिसके चलते उनके भीतर आजादी की ज्वाला धधक रही थी। तीनों ने आसपास गांव के दो अन्य लोगों के साथ मिलकर पीपली तगा की पीली कोठी को आग के हवाले कर दिया था। हालांकि बाद में सभी क्रांतिकारियों को पकड़ कर जेल भेज दिया गया।
जटपुरा गांव का प्रधान होने का मुझे गर्व है। जटपुरा गांव के लोग अपने पूर्वजों के नक्शे कदम पर चलते हुए प्रेमभाव से रहते हैं। जटपुरा गांव की पहचान क्रांतिकारियों के नाम से होती है।
-चरन सिंह, ग्राम प्रधान जटपुरा।
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क्रांतिकारियों के नाम की चर्चा होने पर मुझे जटपुरा गांव का निवासी बताने पर गर्व महसूस होता है। जटपुरा गांव के लोगों से अंग्रेज भी घबराते थे।
-अमित कुमार, ग्रामीण जटपुरा