अमरोहा। किसी भी खुशी या धार्मिक पर्व के अवसर पर अमरोहा की ढोलक की थाप के बिना संगीत अधूरा रहता है। नवरात्र पर भी मां दुर्गा की आराधना में अमरोहा के ढोलक, तबले और अन्य वाद्ययंत्र की गूंज के साथ माता रानी की आराधना की जा रही है। नवरात्र में अमरोहा की ढोलक और तबलों की की खूब मांग हो रही है। तमाम शहरों में अमरोहा से ढोलकें पहुंचाई जा रही हैं। इन दिनों में रोजाना करीब तीन हजार ढोलक, तबले, डमरू व अन्य म्यूजिक इंस्ट्रूमेट की सप्लाई हो रही है।
अमरोहा में बनने वाले ढोलक और तबले देश दुनिया में प्रसिद्ध हैं। यहां बने ढोलक सऊदी अरब, कनाडा, यूएस, ईरान सहित दूसरे देशों में भेजे जाते हैं, जो संगीत की दुनिया में अमरोहा की शान बढ़ाते हैं। यही ढोलक और तबले नवरात्र पर भी अमरोहा की पहचान बनते हैं। वर्ष 2017 से पहले विलुप्त होने की कगार पर पहुंचे ढोलक कारोबार को ओडीओपी नाम की संजीवनी मिली तो फिर से चमक और धमक लौट आई। शारदीय नवरात्रों पर ढोलक, नाल, तबला और डमरू की सबसे अधिक मांग है। इसके अलावा विशेष यंत्र पखावत की भी मांग बढ़ी है।
कई राज्यों से आ रही खूब डिमांड
कारोबारियों के मुताबिक शहर में 300 इकाइयां हैं। डिमांड के अनुसार रोजाना करीब तीन हजार ढोलक-तबलों के अलावा लकड़ी के म्यूजिक इंस्ट्रूमेट सप्लाई की जा रही है। इस समय सबसे ज्यादा डिमांड गुजरात, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पटना, कोलकाता व राजस्थान से आई है। वहीं नामचीन जागरण पार्टियों की तरफ से भी ऑर्डर मिल रहे हैं। नवरात्र को लेकर भी कारोबारियों में बेहद उत्साह है। जो दिन रात ढोलक व अन्य उत्पाद तैयार करने में लगे हैं।
वैसे तो देशभर में हर समय ढोलक-तबले की सप्लाई होती है, लेकिन शारदीय नवरात्र पर डिमांड बढ़ गई है। इस समय उड़ीसा, पटना, कोलकाता और राजस्थान से मांग आई है। सबसे अधिक मांग गुजरात, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से है। यहां से रोजाना करीब पांच से छह लाख रुपये की कीमत के ढोलक तबले के अलावा लकड़ी के म्यूजिक इंस्ट्रूमेट डिमांड के अनुसार भेजे जा रहे हैं।
- शक्ति कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष, लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन।