अमरोहा। बिना लेनदेन किए मजदूर के खाते से 3.60 लाख रुपये गायब हो गए। शिकायत के बाद उनके खाते में 20 हजार रुपये वापस आ गए। बैंक ने बाकी रुपये लौटाने से इन्कार कर दिया। उपभोक्ता फोरम ने बैंक को 3.40 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत लौटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आर्थिक व मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
पूरी धनराशि एक महीने के भीतर अदा करनी होगी। अमरोहा नगर के मोहल्ला पीरगढ़ निवासी भगवान दास का एक बैंक में बचत खाता है, जिसमें 397131 रुपये जमा थे। उन्होंने काफी समय तक खाते में लेनदेन नहीं किया। 24 मार्च 2022 को जरूरत पड़ने पर वह बैंक से रुपये निकालने पहुंचे तो उनके खाते में सिर्फ 28356 बकाया थे। उन्होंने बैंक खाते का स्टेटमेंट निकलवाया तो 14 अगस्त 2021 से 8 अक्तूबर 2021 तक 3.60 लाख रुपये फर्जी तरीके से निकाले गए थे, जबकि भगवान दास ने खाते से कभी कोई रकम नहीं निकाली। उनके पास एटीएम या चेक बुक भी नहीं थी।
उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की तो साइबर टीम की जांच करने पर पता चला कि उनके खाते से अंगूठे का क्लोन बनाकर जनसेवा केंद्र से धनराशि निकल गई है, जबकि भगवान दास द्वारा जनसेवा केंद्र से कोई पैसा नहीं निकला गया। 5 मई 2022 को उनके खाते में 20 हजार रुपये वापस आ गए। जबकि बाकी धनराशि नहीं मिली।
इस मामले में भगवान दास ने बैंक को नोटिस जारी किया। इसके बाद भी बैंक ने धनराशि वापस नहीं की। लिहाजा भगवान दास ने मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बैंक के अधिकारियों को तलब कर लिया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद बैंक को सेवा में कमी का दोषी पाया। साथ ही उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह ने बैंक को 3.40 लाख रुपये को नौ प्रतिशत ब्याज समेत लौटाने के निर्देश दिए। साथ ही आर्थिक और मानसिक पीड़ा के लिए 15 हजार और वाद व्यय के रूप में खर्च 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।