बंद गोशाला को पशु सुपुर्द किए जाने का मामला लखनऊ तक पहुंचने के बाद अफसर जांच को लेकर गंभीर हो गए हैं। एएसपी की पड़ताल थानेदारों की टेंशन बढ़ा रही है। उनके द्वारा पहले बंद और फिर दूसरी गोशाला में जाकर पशुओं का सत्यापन किया जाएगा। सुपुर्दगीनामे की भी जांच की जाएगी। बहरहाल अभी तक जांच अधिकारी की विवेचना रिकार्ड तलबी तक सिमटी है।
उ.प्र. गो सेवा आयोग के सदस्य राहुल सिंह ने एसपी से सूचना प्राप्त करने के बाद जब वृंदावन गोशाला उत्थान समिति का स्थलीय निरीक्षण किया था तो मौके का नजारा देखकर दंग रह गए थे। यहां गोशाला की बजाय ईख खड़ी मिली थी, जबकि जनपद के पांच थानों की पुलिस बराबर उसको पशु भेज रही थी। अगस्त माह में गजरौला, धनौरा, देहात, हसनपुर व डिडौली थाने से 29 पशु गोशाला के सुपुर्द किए गए थे।
कई साल से गोशाला बंद होने के मामले को लेकर आयोग के सदस्य संजीदा हो गए थे। उन्होंने लखनऊ के अन्य सदस्यों को मामले से अवगत कराया था। आईजी को भी जनपद पुलिस की करतूत बताई थी।
मामले के तूल पकड़ते ही अफसर भी हरकत में आ गए थे। एसपी ने पूरे मसले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक उदय शंकर को सौंप दी थी। अब जांच अधिकारी द्वारा प्रकरण को संजीदगी से लिया जा रहा है। उन्होंने पांचों थानेदारों से मवेशियों से संबंधित सुपुर्दगीनामे तलब किए हैं।
इसके अलावा उनके द्वारा की जा रही तफ्तीश का कार्य धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। पहले बंद और फिर उन्होंने दूसरी गोशालाओं में दिए पशुओं की काउंटिंग करने का फैसला लिया है। बात चाहें जो भी हो, लेकिन एएसपी की जांच से मामले में फंसे पांचों थानेदारों की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं।