अमरोहा। शब-ए-बरात के उपलक्ष्य में आईएम इंटर कॉलेज ओल्ड बॉयज एसोसिएशन व यूपी उर्दू अदब सोसाइटी के संयुक्त संयोजन में रविवार रात शहर के आबिदी हाउस में महफिल-ए-नात व मनकबत का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किए।
महफिल की शुरुआत तकी उल हसन रिजवी ने तिलावते कलामे पाक से की। इसके बाद मौलाना अतीकुर्रहमान फारूकी ने सीरते रसूल पर तकरीर की। जुबैर इब्ने सैफी ने कहा...सारे जहां को दरसे मसावात दे गया, वो बोरिया नशीन वो सुल्ताने कायनात। शहाब अनवर ने पढ़ा...रोजे के करीब आते-आते दीवाने समझने लगते हैं, क्या फैजे इलाही होता है क्या ख्वाहिशे जन्नत होती है। शीबान कादरी ने यूं कहा...जुल्मते कुफ्र से कह दो के न उलझे हमसे, हम मदीने की तजल्ली में नहाए हुए हैं। शानदार अमरोहवी ने पढ़ा...भीख सदके में मुस्तफा के मिली, हाथ जो ही उठे दुआ के लिए। रिजवान अब्बास ने ऐसे पढ़ा...भेजो दुरूद शाफा-ए-महशर पे बेहिसाब, रोजे हिसाब ये भी जुड़ेगा हिसाब में। फैजी अमरोहवी ने कहा...ये सिर्फ फैज है जिक्र-ए-रसूल का, हर शख्स के नसीब में जन्नत में घर नहीं। फराज अर्शी ने पढ़ा...ये है इमाम की रहमत के उनकी मिदहत में, हमारे जैसे गुनहागार शेर कहने लगे। महफिल में इनके अलावा अख्तर उल अब्बास गुलजार, गुलरेज अब्बासी ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। अध्यक्षता डॉ. मिस्बाह अहमद सिद्दीकी व संचालन सैय्यद शीबान कादरी ने किया।
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