कभी पानी से लबालब रहने वाले तालाब अब बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। इससे सिंचाई के लिए तो संकट है ही, मवेशियों के लिए पानी का संकट गहरा गया है। नतीजतन किसान मवेशियों को रखने से या तो किनारा कर रहे हैं या कम कर दिया है। शासन और प्रशासन के इन जलस्रोतों को पुनर्जीवित करनेे के प्रयास नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं। यह दास्तान ज्यादातर गांवों की है।
अमरोहा ब्लाक के गांव फरीदपुर में चार तलाब हैं। गांव के बुजुर्ग रामपाल सिंह (65) बताते हैं कि शुरू में इन तालाबों में काफी पानी था। पानी इतना साफ था कि ग्रामीण खुद भी इसे पीते थे। मवेशियों के लिए तो ये जीवन रेखा के सामान था। अब हालात ये है कि बरसात के दिनों में तो इसमें कुछ पानी भर जाता है।
गर्मी शुरू होते ही तालाब में एक बूंद भी नजर नहीं आती है। जलस्तर गिरने से ग्रामीण अपने लिए ही पानी के प्रबंध में उलझे रहते हैं, मवेशियों के लिए पानी का प्रबंध कहां से करें। ग्रामीण बताते हैं कि पहले सभी किसानों के घर में मवेशी हुआ करते थे। तालाबों और कुओं के सूखने से अब किसान मवेशियों को रखने से ही किनारा करने लगे हैं।