सपा के युवा नेता तैयब अली को तुर्क समाज के युवाओं का नेतृत्व करना भारी पड़ गया। उन्हें जिलाध्यक्ष ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है। तैयब अली ने शौकत पाशा के तीजे में भी अपने विचार रखे थे और युवा महासम्मेलन के आयोजकों में शामिल थे। उनका कहना है कि उन्हें पार्टी से निकाला जा सकता है, लेकिन सपा उनके दिल में हैं। ये कदम कैबिनेट मंत्री महबूब अली के दबाव में उठाया गया है।
शौकत पाशा हत्याकांड के जिले की सियासत गरमाई हुई है। कैबिनेट मंत्री महबूब अली को जहां तुर्क बिरादरी के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी भी इससे अछूती नहीं है। सपा से जुड़े लोग भी पार्टी को ताक पर रख कर बिरादरी का साथ दे रहे हैं और कैबिनेट मंत्री महबूब अली का विरोध कर रहे हैं। ऐसे लोगों पर अब संगठन का डंडा चलना शुरू हो गया है। जिलाध्यक्ष ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के पूर्व जिला उपाध्यक्ष को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के बीच मचे घमासान के बीच जब यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष मो. एबाद को पार्टी से निकाला गया था, उस समय विरोध में तैयब अली ने भी विरोध में जिला उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन पार्टी में बने हुए थे।
शौकत पाशा हत्याकांड के बाद कैबिनेट मंत्री महबूब अली के खिलाफ हुए हर विरोध प्रदर्शनों में उनका शामिल होना और तुर्क बिरादरी का साथ देना उन्हें महंगा पड़ गया। प्रस्तावित तुर्क युवा महासम्मेलन के आयोजकों में भी वो शामिल थे और जनसंपर्क में जुटे हुए थे। इस संबंध तैयब अली ने कहा कि कैबिनेट मंत्री के दबाव में ये कदम उठाया गया है। सपा मेरे दिल में हैं। यहां से उसे कोई नहीं निकाल सकता है। उन्होंने अपने जान पर भी खतरा बताया है।