आखिर वही हुआ जिसका अंदेशा जताया जा रहा था। पुलिस-प्रशासन के बढ़ते दबाव के बीच सभा की अनुमति नहीं मिलने और बिरादरी के वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर तुर्क समाज के युवाओं ने महासम्मेलन को स्थगित करने की घोषणा कर दी। आयोजकों ने कहा कि पुलिस प्रशासन सत्ता के दबाव में काम कर रहा है, लेकिन हम इंसाफ की आवाज को बुलंद करेंगे। प्रशासन के बातचीत के बाद महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
तुर्क युवा सम्मेलन को लेकर पुलिस-प्रशासन ने जैसी स्क्रिप्ट लिखी वैसा ही हुआ। शुरू से ही युवा महासम्मेलन को न होने देने की रणनीति पर काम कर रही पुलिस की ये नीति काम आ गई। बिरादरी के वरिष्ठ नेता डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क से मुलाकात के बाद महासम्मेलन के आयोजक युवाओं ने इसे स्थगित करने की घोषणा कर दी।
शुक्रवार को जोया में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयोजकों ने कहा कि क़ौम के बुजुर्गों की अपील, स्थानीय प्रशासन की ओर से जिले में धारा 144 लगी होने और सम्मेलन के लिए अनुमति न मिलने पर युवाओं ने महासम्मेलन स्थगित करने का फ़ैसला लिया है। अब ये सम्मेलन प्रशासन से बातचीत करने के बाद आयोजित किया जाएगा।
तुर्क बिरादरी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद डॉ. शफीक़ुर्रहमान बक़ॱर ने युवाओं से सम्मेलन स्थगित करने की अपील की थी जिसे मान लिया गया। डॉ. बक़ॱर ने कहा कि हम ये संदेश नहीं देना चाहते कि तुर्क बिरादरी क़ानून व्यवस्था या प्रशासन के ख़िलाफ़ है। हम संविधान के दायरे में रहते हुए हक़ और इंसाफ़ की आवाज बुलंद करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आज ही डीआईजी से मुलाकात हुई है। पुलिस ने शौक़त पाशा की हत्या की वारदात को अब हत्या के तौर पर ही देख रही है।
पहले दर्ज डकैती की रिपोर्ट को रद्द कर दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि पुलिस बहुत जल्द ही क़ातिलों तक पहुंच जाएगी। इस मौके पर पूर्व विधायक मुन्ना आक़िल, अब्दुल कलाम, मुनाजिर पाशा, मोहम्मद उस्मान, ख़ुर्शीद अनवर, शमीम अहमद, सलीम खां, शमीम अहमद तुर्क, जीशान पाशा, मौलाना तय्यब अली और जाकिर आदि रहे।