मदरसा उसमानिया फैजाने रजा छतरी वाले बाग में शुक्रवार देर रात बहार-ए-तैबा कांफ्रेंस आयोजित की गई। इसमें देश-विदेश के मौलाना जुटे और मुसलमानों को दीन पर चलने की हिदायत की। इसमें इंग्लैंड से आए वर्ल्ड इस्लामी मिशन के जनरल सेक्रेटरी अल्लामा डा. मौलाना फरोगुल कादरी ने दहशतगर्दों को आड़े हाथ लिया।
कहा कि, दहशतगर्दों का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं। जो उनसे ताल्लुक रखे या उनको सही जाने उसका भी हम मुसलमानों या इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है। बोले- हमारे नबी ने मोहब्बत का पैगाम दिया है। मुसलमानों को उसी के मुताबिक कार्य करने चाहिए। इससे पहले कांफ्रेंस का आगाज तिलावते कुरआने पाक से मौलाना दिलशाद ने किया।
नाते पाक का नजराना गुलाम मुर्तजा रामपुरी ने पेश किया। निजामत हजरत मौलाना कलीम अशरफ हसनपुरी ने की। सदारत मुफ्ती मोहम्मद शाहिद हुसैन ने की। बाद में मदरसे से फारिग होने वाले छात्रों की दस्तारबंदी सैयद लुत्फुर्रहमान और अहसन मियां ने की।
मुसलमानाें को तालीम के लिए किया प्रेरित
उन्होंने मुसलमानों को तालीम लेने के लिए भी प्रेरित किया। बोले कि, जिस तरह दूसरी कौमें तालीम हासिल कर रहीं हैं। हमें भी तालीम हासिल करना चाहिए।
तालीम से दूरी बेरोजगारी की वजह
कांफ्रेंस में मुफ्ती मसीहुद्दीन ने भी मुसलमानों को तालीम हासिल करने के लिए प्रेरित किया। बोले कि, मुसलमानों की बेरोजगारी की प्रमुख वजह तालीम से दूरी है। वहीं सीकरी शरीफ से आए मौलाना सैयद नूरुल हसनैन ने नबी की सुन्नतों पर अमल करने की सलाह दी। कहा कि, मुसलमानों को हर काम से दूर रहना चाहिए। देश की तरक्की का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया।