अमरोहा। चिटफंड कंपनी शुरू करने से पहले चरन सिंह प्राइमरी स्कूल में शिक्षक था। चरन सिंह तकरीबन दो से तीन साल तक शिक्षक की नौकरी भी थी। लेकिन ये नौकरी फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लेकर हासिल की थी। जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर चरन सिंह को बर्खास्त कर दिया था। इस मामले में भी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज है।
पैरोल पर छूट आए मुबारकपुर निवासी चरनसिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर वर्ष 2015 में एंपलीफाई रीयल स्टेट चिटफंड कंपनी खोली थी। इससे पहले वह सरकारी टीचर था। उसकी तैनाती हसनपुर ब्लाक क्षेत्र के प्राइमरी स्कूल थी। दो से तीन साल तक उसने नौकरी भी। लेकिन इस बीच उसके विरोधियों ने नौकरी में लगे प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की शिकायत करी दी। इस मामले की जांच हुई तो प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। कम उम्र दर्शाकर नौकरी हासिल की थी। इसके बाद चरन सिंह को बर्खास्त कर दिया गया। साथ ही उसके खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसका मुकदमा भी चल रहा था। चिटफंड के धोखाधड़ी के मुकदमे के साथ वह इस मामले को लेकर भी परेशान था।