अमरोहा। जिले में गन्ने की पेराई रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। पेराई शुरू हुए दो महीनों का अरसा हो गया है, लेकिन चीनी मिलों ने अब तक 20 प्रतिशत गन्ने की खरीद कर सकी है। ऐसे में अब तक 163.54 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई है। गन्ना विभाग और चीनी मिलों की लापरवाही सामने आई है। जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। किसानों का दावा है कि चीनी मिल गन्ना खरीद में तेजी नहीं दिखा रही हैं। पर्ची वितरण में सुधार नहीं आया तो किसान क्रेशर और कोल्हू पर गन्ना बेच सकते हैं। हालांकि किसानों को आर्थिक नुकसान होगा।
जिले में तीन चीनी हैं इसके अलावा पड़ोस के जिलों के 11 चीनी मिलों में गन्ना की सप्लाई होती है। इस बार कुल 794.13 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन हुआ है। चीनी मिलों में पेराई नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू हो गया है। दो महीनों का लंबा अरसा बीत गया है, लेकिन अब तक 20 प्रतिशत गन्ने की पेराई हुई है। आखिर गन्ने की खरीद में देरी क्यों हो रही है। किसान नेताओं का दावा है कि गन्ने की पर्ची देने में मनमानी बरती जा रही है। इससे किसानों को पर्ची नहीं मिल रही है। इसके चलते गन्ना खेत में खड़ा है। अब किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि फसल का क्या करें। गन्ना क्रय केंद्र में जाते हैं तो क्रय केंद्र प्रभारी और स्टाफ बताते हैं कि पर्ची जल्द मिल जाएगी, लेकिन अब तक नहीं मिल सका है। किसानों ने बताया कि यह पीक ऑवर है इसमें गन्ना खरीदने में जानबूझ कर देरी की जा रही है। किसान अपने फसल को लेकर परेशान है। उसने बमुश्किल फसल को तैयार किया है। फसल नहीं बिकने से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता हैं।